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Prime Video पर मौजूद तगड़ी मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म, कहानी का क्लाइमेक्स देख उड़ जाएंगे होश

साल 2008 के चर्चित 'आरुषि-हेमराज हत्याकांड' पर आधारित फिल्म 'तलवार' एक रोंगटे खड़े कर देने वाली मिस्ट्री थ्रिलर है. मेघना गुलजार द्वारा निर्देशित और विशाल भारद्वाज द्वारा लिखित यह फिल्म प्राइम वीडियो पर उपलब्ध एक ऐसी मास्टरपीस है, जो आपको सच और झूठ के बीच के धुंधलेपन में ले जाती है. इरफान खान ने इसमें एक जांच अधिकारी के रूप में जो सधा हुआ अभिनय किया है, वह फिल्म को 'धुरंधर' श्रेणी में खड़ा करता है. इसका क्लाइमैक्स आपको सिस्टम पर सवाल उठाने के लिए मजबूर कर देगा.

वास्तविक केस की निष्पक्ष पड़ताल- 'तलवार' की सबसे बड़ी खूबी इसकी रिसर्च है. फिल्म किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय जांच के दौरान सामने आए अलग-अलग दृष्टिकोणों को पेश करती है. यह दिखाती है कि कैसे एक ही सबूत को दो अलग-अलग जांच टीमें (पुलिस और सीबीआई) अपने-अपने हिसाब से देख सकती हैं. यह दर्शकों को खुद एक जज की कुर्सी पर बिठा देती है.

इरफान खान की धांसू एक्टिंग- सीबीआई ऑफिसर 'अश्विन कुमार' के रूप में इरफान खान ने कमाल कर दिया है. उनकी सूखी हुई आंखें, चेहरे पर पसरी थकान और व्यवस्था के प्रति उनका तंज भरा लहजा फिल्म को बेहद विश्वसनीय बनाता है. उनके अभिनय में जो ठहराव और गहराई है, वह फिल्म के गंभीर मिजाज को बखूबी पकड़ती है. उनके बिना यह फिल्म अधूरी लगती.

पुलिस और सिस्टम की लापरवाही पर प्रहार- फिल्म बहुत ही बेरहमी से दिखाती है कि कैसे शुरुआती जांच में स्थानीय पुलिस की लापरवाही ने पूरे केस को बिगाड़ दिया. सबूतों के साथ छेड़छाड़, गवाहों पर दबाव और मीडिया ट्रायल जैसे पहलुओं को फिल्म में बहुत ही प्रभावी ढंग से बुना गया है. यह हिस्सा देख कर किसी भी आम नागरिक का खून खौल सकता है.

सस्पेंस और तनाव- विशाल भारद्वाज की पटकथा इतनी कसी हुई है कि ढाई घंटे तक आपका ध्यान एक पल के लिए भी नहीं भटकता. फिल्म में कोई भी सीन गैर-जरूरी नहीं लगता. अंधेरी गलियों, पुराने दफ्तरों और क्राइम सीन के दृश्यों को जिस तरह फिल्माया गया है, वह एक डरावना और तनावपूर्ण माहौल पैदा करता है जो एक मिस्ट्री थ्रिलर के लिए जरूरी है.

हिला देने वाला क्लाइमैक्स और बहस- फिल्म का अंत पारंपरिक 'हैप्पी एंडिंग' नहीं है. अंतिम दृश्यों में जब दो जांच टीमें एक मेज पर बैठकर बहस करती हैं, तो वह हिस्सा फिल्म का सबसे मजबूत और कड़वा सच है. न्याय की बलि कैसे चढ़ती है, इसका उदाहरण वह क्लाइमैक्स है जो आपके दिमाग को सुन्न कर देगा और लंबे समय तक आपके जहन से नहीं निकलेगा.