---विज्ञापन---
Prime Video पर 7 एपिसोड की एकदम तगड़ी सस्पेंस-थ्रिलर सीरीज, कहानी देख फटी रह जाएंगी आंखें

अगर आप क्राइम और सस्पेंस वाली सीरीज के दीवाने हैं, तो अमेजन प्राइम वीडियो की 'दलदल' (Daldal) आपके लिए एकदम सही 'बिंज-वॉच' है. 7 एपिसोड की यह सीरीज केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका और यूके जैसे देशों में भी टॉप ट्रेंडिंग में बनी हुई है. भूमि पेडनेकर ने इसमें एक जांबाज पुलिस ऑफिसर (DCP) का रोल निभाया है, जो मुंबई में हो रही रहस्यमयी हत्याओं की गुत्थी सुलझाती है. यह कहानी आपको अंत तक सोचने पर मजबूर कर देगी कि असली कातिल कौन है.

मुंबई में सीरियल किलर का आतंक- कहानी की शुरुआत मुंबई में हो रही मर्दों की अजीबोगरीब हत्याओं से होती है. इन हत्याओं का तरीका इतना डरावना और रहस्यमयी है कि पूरी पुलिस फोर्स और शहर में दहशत फैल जाती है. केस की जिम्मेदारी तेज-तर्रार DCP रीटा फरेरा (भूमि पेडनेकर) को दी जाती है, जो इस खूनी खेल को खत्म करने निकलती हैं.

अतीत के साये और वर्तमान की जंग- सीरीज का नाम 'दलदल' इसलिए है क्योंकि रीटा फरेरा सिर्फ बाहर के मुजरिमों से ही नहीं लड़ रही हैं, बल्कि वे अपने खुद के अतीत और निजी जिंदगी की उलझनों के दलदल में भी फंसी हुई हैं. एक तरफ शातिर कातिल पुलिस को चुनौती दे रहा है, तो दूसरी तरफ रीटा को अपने अंदर के डर का सामना करना पड़ रहा है.

भूमि पेडनेकर: कंटेंट की नई क्वीन- भूमि ने हमेशा से ही लीक से हटकर किरदार चुने हैं. 'दम लगा के हईशा' से 'भक्षक' तक का उनका सफर शानदार रहा है, लेकिन 'दलदल' में एक सख्त और भावुक पुलिस ऑफिसर के रूप में उन्होंने जान फूंक दी है. उनका अभिनय इतना सधा हुआ है कि आपको एक पल के लिए भी स्क्रीन से नजर हटाने का मौका नहीं मिलेगा.

साइकोलॉजिकल थ्रिलर का असली मजा- यह सीरीज सिर्फ एक साधारण पुलिस जांच नहीं है, बल्कि यह इंसानी दिमाग के अंधेरे कोनों को भी दिखाती है. कहानी को इस तरह बुना गया है कि एक वक्त पर आपको खुद रीटा के किरदार पर ही शक होने लगता है. अमृत राज गुप्ता का निर्देशन हर एपिसोड के साथ सस्पेंस को और गहरा करता जाता है.

क्यों है यह 'मस्ट-वॉच'?- अगर आपको 'पाताल लोक' या 'दिल्ली क्राइम' जैसी डार्क और हकीकत के करीब लगने वाली सीरीज पसंद हैं, तो 'दलदल' आपकी लिस्ट में जरूर होनी चाहिए. 7 एपिसोड के इस सफर में आपको ढेर सारे ट्विस्ट और टर्न मिलेंगे, और क्लाइमैक्स तो ऐसा है कि आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएंगी.