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जैज सैक्सोफोन के दिग्गज Sonny Rollins का निधन, 95 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा; भारत से था गहरा नाता

Sonny Rollins Passes Away: मशहूर अमेरिकी जैज सैक्सोफोन वादक सोनी रोलिंस का 95 साल की उम्र में निधन हो गया है. अपने संगीत से दुनिया को दीवाना बनाने वाले सोनी रोलिंस का भारत से खास लगाव था. साल 1968 में वे मानसिक शांति और योग सीखने के लिए भारत आए थे.

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Sonny Rollins Passes Away: जैज (Jazz) संगीत की दुनिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. मशहूर सैक्सोफोन वादक सोनी रोलिंस (Sonny Rollins) का 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. उन्होंने न्यूयॉर्क के वुडस्टॉक स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली. सोनी रोलिंस का भारत और यहां के अध्यात्म (Spirituality) से बहुत गहरा और अटूट नाता था. 1950 और 60 के दशक में जब उनका करियर ऊंचाइयों पर था, तब वे सब कुछ छोड़कर आध्यात्मिक शांति और योग की तलाश में भारत (मुंबई) आ गए थे. उन्होंने यहां के एक आश्रम में रहकर योग सीखा, जिसने उनके जीवन और संगीत को पूरी तरह बदल दिया. फेफड़ों की बीमारी (पल्मोनरी फाइब्रोसिस) के कारण साल 2014 में संगीत से संन्यास लेने वाले सोनी ने 95 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया.

अध्यात्म की तलाश में आए थे भारत

साल 1968 में सोनी रोलिंस अपने करियर के शिखर पर थे, लेकिन वे अंदर से परेशान थे. उन्होंने खुद बताया था, “मैं बहुत ज्यादा शराब और सिगरेट पीने लगा था, ड्रग्स लेता था. मुझे जीवन में कोई सही रास्ता नहीं दिख रहा था. तब मैंने खुद से योग सीखना शुरू किया और फिर गहराई से सीखने के लिए सिर्फ एक बैग और अपना सैक्सोफोन लेकर मुंबई (पवई) के एक आश्रम में आ गया. भारत यात्रा ने मुझे अंदर से बदल दिया.”

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7 साल की उम्र में मिला था पहला सैक्सोफोन

न्यूयॉर्क के हार्लेम में पले-बढ़े सोनी ने बचपन में पियानो बजाना सीखा था. लेकिन जब वे 7 साल के थे, तो उनकी मां ने उन्हें एक सैक्सोफोन गिफ्ट किया. सोनी ने बताया था कि वे कमरे में जाकर अकेले इसे बजाते थे और उन्हें ऐसा लगता था जैसे वे सीधे संगीत के देवता से बात कर रहे हों.

संगीत के बेताज बादशाह और मशहूर एल्बम्स

सोनी रोलिंस को संगीत की दुनिया में ‘सैक्सोफोन कोलोसस’ (Saxophone Colossus) कहा जाता था. उनके साल 1956 के दो एल्बम्स— ‘टेनोर मैडनेस’ (Tenor Madness) और ‘सैक्सोफोन कोलोसस’ को संगीत के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है. उन्होंने जॉन कोलट्रेन और माइल्स डेविस जैसे महान संगीतकारों के साथ काम किया था.

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भारत के लिए हमेशा धड़का दिल

भारत के प्रति उनका प्यार कभी कम नहीं हुआ. साल 1978 में जब मुंबई में पहले ‘जैज यात्रा’ (Jazz Yatra) महोत्सव का आयोजन हुआ, तो सोनी रोलिंस विशेष रूप से परफॉर्म करने भारत आए. वहां उन्होंने स्टीवी वंडर के मशहूर गाने ‘इजंट शी लवली’ की ऐसी धुन बजाई कि भारतीय दर्शक झूम उठे थे.

ग्रैमी अवार्ड और अंतिम समय

सोनी रोलिंस को साल 2004 में संगीत के सबसे बड़े पुरस्कार ‘ग्रैमी लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से नवाजा गया था. साल 2014 में फेफड़ों की गंभीर बीमारी के कारण उन्होंने सैक्सोफोन बजाना बंद कर दिया था. वे हमेशा कहते थे कि वे संगीत में बहुत आगे, खुद की पहचान से भी परे जाना चाहते हैं.

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First published on: May 27, 2026 12:19 PM

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