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Prime Video की 2 घंटे 35 मिनट की तगड़ी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म, कहानी में हर मोड़ पर मिलेगा चौंकाने वाला रहस्य

शेक्सपियर के महान नाटक 'ओथेलो' को उत्तर प्रदेश की देसी मिट्टी और बाहुबली राजनीति के साथ घोलकर पर्दे पर उतारना किसी चुनौती से कम नहीं था, जिसे विशाल भारद्वाज ने बखूबी अंजाम दिया. अमेजन प्राइम वीडियो पर मौजूद यह 'कल्ट क्लासिक' फिल्म दिखाती है कि कैसे सत्ता, वफादारी और शक एक हसीन जिंदगी को नरक बना सकते हैं. फिल्म की रूह 'लंगड़ा त्यागी' का वह प्रतिशोध है, जो खुद को दरकिनार किए जाने के अपमान को सह नहीं पाता और अपने ही आका के मन में शक का ऐसा जहर घोलता है कि रिश्तों का अंत बेहद खौफनाक होता है. अजय देवगन की तीव्रता और सैफ अली खान की कुटिलता ने इस फिल्म को भारतीय सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा दिया है.

सैफ अली खान का 'लंगड़ा त्यागी' अवतार- यह फिल्म सैफ के करियर का टर्निंग पॉइंट मानी जाती है. एक लंगड़ाते हुए, पान चबाते और साजिशें रचते 'विलेन' के रूप में उन्होंने इतनी गहराई दिखाई कि दर्शकों के मन में उनके प्रति नफरत और खौफ एक साथ पैदा हो गया.

शक का जानलेवा बीज- फिल्म का मुख्य सस्पेंस तब शुरू होता है जब लंगड़ा त्यागी एक कीमती कमरबंद का सहारा लेकर ओमकारा को यकीन दिला देता है कि उसकी मासूम पत्नी डॉली (करीना कपूर) और उसके दोस्त केसु (विवेक ओबेरॉय) के बीच अवैध संबंध हैं.

राजनीति और बाहुबल का संगम- फिल्म की पृष्ठभूमि यूपी की गंदी राजनीति और 'भाईसाहब' (नसीरुद्दीन शाह) के रसूख पर टिकी है. यहाँ दोस्ती और गद्दारी के बीच की लकीर बहुत धुंधली है.

रोंगटे खड़े कर देने वाला क्लाइमेक्स- फिल्म का अंत किसी की भी आत्मा को झकझोर सकता है. शक में अंधा होकर अपनी ही पत्नी की जान लेने वाला नायक जब सच से रूबरू होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. वह सन्नाटा दर्शकों को सन्न कर देता है.

शानदार गाने- विशाल भारद्वाज ने न केवल निर्देशन किया, बल्कि फिल्म का संगीत भी दिया. 'बीड़ी जलइले' से लेकर 'नैना ठग लेंगे' तक, हर गाना कहानी के मिजाज को और भी गहरा बनाता है. साथ ही, फिल्म के ठेठ देसी संवाद इसे बेहद वास्तविक बनाते हैं.