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‘Mardani 3’ और ‘Border 2’ को निगल गई ये फिल्म, ऑडियंस ने फिर किसी मूवी को नहीं दिया इतना तवज्जो!

बॉक्स ऑफिस पर कभी-कभी ऐसी फिल्म आती है जो दर्शकों के सोचने का नजरिया बदल देती है. रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर' ने कुछ ऐसा ही कमाल कर दिखाया है. इस फिल्म की कहानी इतनी जबरदस्त और प्रभावशाली थी कि इसके बाद रिलीज हुई 'बॉर्डर 2' और 'मर्दानी 3' जैसी बड़ी फिल्में भी फीकी लगने लगीं. 'धुरंधर' को देखने के बाद ऑडियंस की उम्मीदें (Expectations) इस कदर बढ़ गईं कि उन्होंने इन कल्ट क्लासिक्स के सीक्वल को भी सिरे से नकार दिया. आज आलम यह है कि हर फिल्म की तुलना 'धुरंधर' के स्टैंडर्ड से की जा रही है.

कहानी का मास्टरक्लास- 'धुरंधर' की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्क्रिप्ट थी. रणवीर सिंह ने जिस गहराई से अपना किरदार निभाया और फिल्म की कहानी में जो ट्विस्ट्स थे, उसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इसके ठीक बाद जब लोगों ने 'बॉर्डर 2' देखी, तो उन्हें वह पुरानी और घिसी-पिटी लगी. 'धुरंधर' की ओरिजिनलिटी के सामने 'बॉर्डर 2' का देशभक्ति वाला वही पुराना अंदाज दर्शकों को बांधने में नाकाम रहा.

बढ़ती उम्मीदों का बोझ- जब आप एक 'धुरंधर' जैसी परफेक्ट फिल्म देख लेते हैं, तो आपकी पसंद बदल जाती है. 'मर्दानी 3' अपनी पिछली दो फिल्मों की वजह से चर्चा में तो थी, लेकिन 'धुरंधर' देखने के बाद ऑडियंस कुछ बहुत ही अलग और पावरफुल सिनेमा चाहती थी. 'मर्दानी 3' में रानी मुखर्जी की एक्टिंग तो अच्छी है, लेकिन कहानी में वो नयापन नहीं दिखा जो 'धुरंधर' में था.

तुलना ने बिगाड़ा खेल- सोशल मीडिया पर 'धुरंधर' की इतनी तारीफ हुई कि दर्शकों ने अनजाने में ही 'बॉर्डर 2' और 'मर्दानी 3' की तुलना उससे करना शुरू कर दिया. 'बॉर्डर 2' का एक्शन और 'मर्दानी 3' का थ्रिल, 'धुरंधर' के लेवल के सामने कमतर महसूस हुआ. इसी तुलनात्मक नजरिए की वजह से इन दोनों बड़ी फिल्मों को वह तवज्जो नहीं मिली, जिसकी उम्मीद की जा रही थी.

रणवीर सिंह का इम्पैक्ट- 'धुरंधर' में रणवीर सिंह की एक्टिंग ने एक नया बेंचमार्क सेट कर दिया है. 'बॉर्डर 2' की मल्टीस्टारर कास्टिंग और 'मर्दानी 3' की सोलो लीड परफॉर्मेंस, दोनों ही उस प्रभाव को नहीं दोहरा पाईं. दर्शकों को अब सिर्फ बड़े नाम नहीं, बल्कि 'धुरंधर' जैसा दमदार कंटेंट और स्क्रीन प्रेजेंस चाहिए.

ऑडियंस का बदला हुआ टेस्ट- 'धुरंधर' की सफलता ने यह साबित कर दिया कि अब दर्शक सिर्फ स्टार पावर के पीछे नहीं भागते. यही कारण है कि 'बॉर्डर 2' जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी होने के बावजूद, फिल्म को लेकर वो पागलपन नहीं दिखा. ऑडियंस अब कंटेंट को लेकर इतनी चूजी हो गई है कि 'धुरंधर' के बाद आई हर फिल्म उन्हें एवरेज लग रही है.