Thursday, 26 February, 2026

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Jio Hotstar की बेहतरीन सस्पेंस और मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म, मिलेगा ऐसा सस्पेंस कि कहानी भूल नहीं पाएंगे

'अपूर्वा' बॉलीवुड की उन चुनिंदा फिल्मों में से है जो एक मासूम लड़की के खौफनाक संघर्ष और उसके भीतर छिपी ताकत की कहानी कहती है. फिल्म की शुरुआत एक खुशहाल सगाई से होती है, लेकिन कहानी तब खौफनाक मोड़ लेती है जब चंबल के डाकू अपूर्वा का अपहरण कर लेते हैं. तारा सुतारिया ने इस फिल्म में ग्लैमर छोड़कर एक ऐसी 'धांसू' परफॉरमेंस दी है, जो आपको हैरान कर देगी. अगर आप कम समय में बेहतरीन सस्पेंस और थ्रिल महसूस करना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक जबरदस्त विकल्प है.

सर्वाइवल थ्रिलर का नया चेहरा- यह फिल्म केवल एक अपहरण की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि एक साधारण लड़की मौत के सामने खड़े होने पर कितनी खतरनाक हो सकती है. चंबल के बीहड़ों में फंसी अपूर्वा का खुद को बचाने का संघर्ष हर पल सस्पेंस पैदा करता है. फिल्म की रफ्तार इतनी तेज है कि आपको सोचने का मौका भी नहीं मिलता.

तारा सुतारिया का पावर-पैक ट्रांसफॉर्मेशन- अपूर्वा के किरदार में तारा सुतारिया ने सबको चौंका दिया है. मिट्टी में सनी हुई, जख्मी और डरी हुई होने के बावजूद उनकी आंखों में दिखने वाला प्रतिशोध फिल्म की जान है. उन्होंने साबित कर दिया है कि वह केवल एक ग्लैमरस अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक गंभीर कलाकार भी हैं. उनका यह 'धुरंधर' अवतार दर्शकों को अंत तक फिल्म से जोड़े रखता है.

अभिषेक बनर्जी और राजपाल यादव का खौफनाक अंदाज- फिल्म में विलेन्स की भूमिका ने सस्पेंस को और गहरा कर दिया है. राजपाल यादव को एक खतरनाक और क्रूर अवतार में देखना रोंगटे खड़े कर देता है, वहीं अभिषेक बनर्जी ने अपनी नकारात्मक भूमिका से एक बार फिर डराया है. इन दोनों की जुगलबंदी ने फिल्म में एक ऐसा तनाव (Tension) पैदा किया है जो आपको असहज कर देगा.

रॉ और रियल सिनेमैटोग्राफी- निर्देशक निखिल नागेश भट ने फिल्म को बहुत ही 'रॉ' और वास्तविक रखा है. चंबल के सुनसान इलाके, टूटे हुए खंडहर और रात के अंधेरे में फिल्माए गए सीन एक डरावना माहौल बनाते हैं. कैमरा वर्क और बैकग्राउंड म्यूजिक इतना सटीक है कि आप खुद को अपूर्वा की जगह महसूस करने लगते हैं, जिससे थ्रिल का अनुभव दोगुना हो जाता है.

वो क्लाइमैक्स जो रोंगटे खड़े कर देगा- फिल्म का अंत वह नहीं है जिसकी आप एक साधारण किडनैपिंग ड्रामा से उम्मीद करते हैं. फिल्म का आखिरी हिस्सा किसी शिकार और शिकारी के खेल जैसा है. जिस तरह से अपूर्वा पलटवार करती है और अंत में जो सस्पेंस खुलता है, वह देखकर आप फिल्म को लंबे समय तक भूल नहीं पाएंगे. यह हिस्सा महिला सशक्तिकरण का एक उग्र रूप पेश करता है.

First published on: Feb 26, 2026 06:28 PM

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