Saturday, 14 March, 2026

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Raktanchal से भी तगड़ी है ये जबरदस्त सस्पेंस-थ्रिलर वाली सीरीज, हर एपिसोड में मिलेगा धांसू सस्पेंस

अगर आपको क्राइम-थ्रिलर के साथ सस्पेंस वाली कहानियां भी पसंद आती हैं, तो हम आपको एक ऐसी ही धांसू सीरीज के बारे में बता रहे हैं. इस सीरीज में आपको कदम-कदम पर क्राइम और सस्पेंस देखने को मिलेगा. सीरीज को देखकर आपको 'रक्तांचल' की रंगदारी भी फीकी लगने लगेगी. दरअसल इस सीरीज का नाम पाताल लोक है, जो अपनी दमदार कहानी के चलते आपको खूब पसंद आएगी.

रक्तांचल से भी खौफनाक है ये 'पाताल लोक'- अगर आपको लगता है कि वसीम खान और विजय सिंह की खूनी जंग ही अपराध की चरम सीमा है, तो शायद आप 'पाताल लोक' के अंधेरे से अभी तक अनजान हैं. जहाँ 'रक्तांचल' वर्चस्व और टेंडरों की सीधी लड़ाई थी, वहीं यह सीरीज अपराध के उस पाताल में ले जाती है जहां से वापसी मुमकिन नहीं. यह सिर्फ एक क्राइम ड्रामा नहीं, बल्कि भारतीय समाज के उस कड़वे सच का आईना है जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं.

हाथीराम चौधरी—एक थका हुआ 'धुरंधर' सिपाही- कहानी के केंद्र में है दिल्ली पुलिस का एक साधारण इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी (जयदीप अहलावत). अपनी नौकरी से थका हुआ और सिस्टम से हारा हुआ यह सिपाही एक ऐसे हाई-प्रोफाइल केस में फंस जाता है, जो उसे दिल्ली की चकाचौंध से दूर अपराध के 'पाताल' में ले जाता है. जयदीप अहलावत ने इस किरदार में ऐसी जान फूंकी है कि आप उनकी बेबसी और गुस्से को खुद महसूस करने लगेंगे.

स्वर्ग, धरती और पाताल के बीच का खूनी खेल- सीरीज की सबसे बड़ी खूबी इसकी दार्शनिक बनावट है. यह समाज को तीन हिस्सों में बांटती है—अमीर और ताकतवर लोगों का 'स्वर्ग लोक', मध्यम वर्ग का 'धरती लोक' और अपराधियों व हाशिए पर पड़े लोगों का 'पाताल लोक'. जब पाताल के कीड़े धरती लोक पर हमला करते हैं, तो सत्ता के गलियारों में जो भूकंप आता है, वही इस सीरीज का असली सस्पेंस है.

'हथौड़ा त्यागी'- खामोशी जो कलेजा चीर दे- 'रक्तांचल' के विलेन शायद चिल्लाकर अपनी ताकत दिखाते हों, लेकिन अभिषेक बनर्जी द्वारा निभाया गया 'हथौड़ा त्यागी' का किरदार बिना एक शब्द बोले आतंक पैदा करता है. उसकी ठंडी आँखें और हथौड़े का वार भारतीय ओटीटी इतिहास के सबसे डरावने दृश्यों में से एक है. वह कोई ग्लैमरस अपराधी नहीं, बल्कि एक ऐसा खौफनाक चेहरा है जिसे देखकर डर नहीं, बल्कि सिहरन पैदा होती है.

रक्तांचल का एक्शन बनाम पाताल लोक का सस्पेंस- जहां 'रक्तांचल' में गोलियों की तड़तड़ाहट और सीधी भिड़ंत है, वहीं 'पाताल लोक' मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) पर आधारित है. यहाँ हर अपराधी के पीछे एक दर्दनाक कहानी है—चाहे वो चित्रकूट के जंगल हों या पंजाब की गलियां. यह सीरीज दिखाती है कि अपराधी पैदा नहीं होते, बल्कि व्यवस्था द्वारा बनाए जाते हैं. इसका सस्पेंस आपको हर एपिसोड के अंत में सन्न कर देगा.

समाज की गंदी राजनीति पर करारा प्रहार- यह सीरीज सिर्फ मर्डर मिस्ट्री नहीं है, बल्कि यह जातिवाद, लिंग भेद और मीडिया की 'गंदी राजनीति' की परतों को उधेड़ कर रख देती है. एक पत्रकार (संजीव मेहरा) की हत्या की साजिश के बहाने यह सीरीज दिखाती है कि कैसे 'स्वर्ग लोक' में रहने वाले लोग अपने फायदे के लिए पाताल के मोहरों का इस्तेमाल करते हैं. यह राजनीति का वो 'कच्चा-चिट्ठा' है जिसे देख आपका खून खौल उठेगा.

क्यों है यह एक 'मास्टरपीस'?- 9 एपिसोड की यह यात्रा आपको दिल्ली के पॉश इलाकों से लेकर बुंदेलखंड के बीहड़ों तक ले जाएगी. शानदार सिनेमैटोग्राफी और रोंगटे खड़े कर देने वाला बैकग्राउंड स्कोर इसे एक 'धांसू' थ्रिलर बनाता है. अगर आप असली क्राइम और दिमाग घुमा देने वाला सस्पेंस देखना चाहते हैं, तो 'पाताल लोक' से बेहतर और कुछ नहीं.

First published on: Mar 13, 2026 12:01 PM

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