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Drishyam छोड़िए इन 5 फिल्मों का सस्पेंस देख उड़ जाएगी रातों की नींद, क्लाइमेक्स है एकदम धांसू

सस्पेंस और थ्रिलर सिनेमा का असली रोमांच उसके 'अनप्रिडिक्टेबल' (जिसका अंदाजा न लगाया जा सके) होने में है. ओटीटी पर मौजूद ये फिल्में इसी फार्मूले पर सटीक बैठती हैं. यहाँ 'कहानी' की विद्या बालन की बेबसी के पीछे छिपा राज है, तो 'हसीन दिलरुबा' के प्यार और धोखे का खूनी खेल भी. इन फिल्मों की सबसे बड़ी ताकत इनका क्लाइमैक्स है, जो आखिरी 10 मिनट में पूरी कहानी को पलट कर रख देता है. चाहे वह दिल्ली के अपराध जगत की डार्क हकीकत दिखाने वाली 'तितली' हो या अंगों की तस्करी के रोंगटे खड़े करने वाले सच को उजागर करती 'जोसफ', ये फिल्में आपको अंत तक स्क्रीन से नजरें हटाने का मौका नहीं देंगी.

तितली (Titli)- यह एक बेहद डार्क और रियलिस्टिक क्राइम थ्रिलर है. दिल्ली के एक ऐसे परिवार की कहानी जो लूटपाट और जघन्य अपराधों में लिप्त है. मुख्य किरदार 'तितली' इस नर्क से निकलना चाहता है, लेकिन किस्मत उसे बार-बार उसी दलदल में खींच लेती है.

इलेवन (11)- यह फिल्म सही मायनों में दर्शकों के 'दिमाग से खेलती' है. रहस्यों से भरी इस कहानी में हर मोड़ पर एक नया ट्विस्ट है. यह फिल्म हमें सिखाती है कि सच हमारी सोच से कहीं ज्यादा गहरा और डरावना हो सकता है.

जोसफ (Joseph)- मलयालम सिनेमा की यह मास्टरपीस अब हिंदी में भी उपलब्ध है. यह एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी की कहानी है, जो अपनी व्यक्तिगत त्रासदी के बावजूद 'ऑर्गन हार्वेस्टिंग' (अंगों की तस्करी) के काले साम्राज्य का पर्दाफाश करता है.

कहानी (Kahaani)- विद्या बालन की यह फिल्म सस्पेंस के मामले में 'कल्ट क्लासिक' मानी जाती है. कोलकाता की गलियों में अपने लापता पति को ढूंढती एक गर्भवती महिला की यह तलाश ऐसे मोड़ पर खत्म होती है, जिसे देखकर दुनिया दंग रह गई थी.

हसीन दिलरुबा (Haseen Dillruba)- प्यार, वासना और मर्डर मिस्ट्री का अनोखा संगम. जब भी आपको लगेगा कि आपने कातिल को पकड़ लिया है, तभी कहानी ऐसी पलटी मारेगी कि आप सन्न रह जाएंगे. तापसी पन्नू और विक्रांत मैसी के अभिनय ने इसे और भी रोमांचक बना दिया है.