Sunday, 25 January, 2026

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बॉलीवुड पर बरसे Prakash Raj, हिंदी फिल्मों को बताया नकली, बोले-‘दर्शकों से कोई…’

Prakash Raj: प्रकाश राज भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का अहम हिस्सा हैं. हाल ही में एक इवेंट के दौरान उन्होंने हिंदी सिनेमा को लेकर बात की और उन्होंने इसे नकली, पैसा कमाने वाला कहा है. साथ ही उन्होंने हिंदी सिनेमा की कई कमियों पर भी बात की है.

Prakash Raj
Prakash Raj

प्रकाश राज फिल्म इंडस्ट्री के बहुत बड़े कलाकारों में से एक हैं. वह हमेशा ही अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. वह अपनी बातों को खुलकर कहना पसंद करते हैं. हालांकि कई बार इसको लेकर वह विवादों में भी आ जाते हैं.हाल ही में एक इवेंट के दौरान जहां प्रकाश राज ने मलयालम और तमिल सिनेमा की तारीफ की, वहीं उन्होंने हिंदी सिनेमा को भटका हुआ, नकली और पैसा कमाने वाला कहा. उन्होंने हिंदी सिनेमा की जमकर आलोचना की और कहा मैडम तुसाद म्यूजियम की तरह हो गई है, जहां सब कुछ सुंदर दिखता है, लेकिन इसका कोई सार नहीं है.

हिंदी सिनेमा को प्रकाश राज ने बताया नकली

प्रकाश ने द आर्टिस्ट आई बिकेम सेशन में कहा, “वर्तमान की बात करें तो मुझे लगता है कि मलयालम और तमिल सिनेमा बहुत स्ट्रॉन्ग फिल्में बना रहे हैं. दूसरी ओर हिंदी सिनेमा अपनी जड़ों से भटक गया है. सब कुछ सुंदर, अद्भुत, प्लास्टिक जैसा दिखता है, जैसा कि आप मैडम तुसाद म्यूजियम में देखते हैं. हमारे(साउथ) के पास अभी भी कहने के लिए कहानियां है, तमिल के नए युवा डायरेक्टर्स दलित मुद्दों पर बात कर रहे हैं और इससे बहुत उम्मीद जगती है. जो तमिल तेलुगू, हिंदी, कन्नड़ और मलयालम सिनेमा में अपने काम के लिए फेमस हैं.

हिंदी सिनेमा की समस्याओं पर बोले प्रकाश राज

60 साल के फिल्म निर्माता-एक्टर ने हिंदी सिनेमा की समस्याओं के बारे में बात करते हुए, इसके गिरावट का कारण मल्टीप्लेक्स को बताया है.उन्होंने कहा, “मल्टीप्लेक्स के बाद, मुंबई फिल्म इंडस्ट्री ने सिर्फ मल्टीप्लेक्स के लिए फिल्में बनाना शुरू कर दिया है. बहुत ही प्यारी प्यारी फिल्में और इसी तरह की चीजें. क्योंकि वे अच्छा परफॉर्म कर रही थी. वे पेज 3 के कल्चर में चले गए और इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र राजस्थान और बिहार से कनेक्शन टूट गया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बदलाव के कारण राष्ट्र निर्माण की उन कहानियों का भी पतन हुआ है, जो कभी आजादी के बाद हिंदी सिनेमा की पहचान थीं.

इस फिल्म का उदाहरण देते हुए प्रकाश ने कही ये बात

उन्होंने इस बीच साल 1977 की फिल्म अमर अकबर एंथोनी को लेकर बात की. उन्होंने बताया कि कैसे तीन अलग धर्म के व्यक्ति किसी एक शख्स की जान बचाने के लिए अपना ब्लड डोनेट करते हैं. इस सीन को याद करते हुए एक्टर ने कहा, अब ऐसा नहीं रहा. आज सब कुछ पैसा और दिखावे के बारे में है. रीलें, पेज 3 पर कवरेज और जोरदार प्रमोशन. इसलिए मुझे लगता है इन सभी के कारण फिल्म इंडस्ट्री से दर्शकों का कनेक्शन खो चुका है.

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First published on: Jan 25, 2026 05:03 PM

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