Saturday, 21 March, 2026

---विज्ञापन---

छोटा गम ₹250, गहरा सदमा ₹500, मुंबई के लड़के ने रोने को बनाया धंधा! रेट कार्ड देख चकराया लोगों का सिर

Mumbai Viral Video: सोशल मीडिया पर किसी भी चीज को वायरल होने में समय नहीं लगता है. जहां आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो ऐसा वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति दूसरों के दुख सुनने के लिए पैसे चार्ज करने के बोर्ड लगाकर मुंबई के एक बीच पर बैठा हुआ है.

Mumbai Viral Video: मुंबई के एक समुद्र तट (Beach) से सामने आए एक हैरान कर देने वाले वीडियो ने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है. जहां लोग अक्सर समंदर किनारे सुकून तलाशने आते हैं, वहीं पृथ्वीराज बोहरा नाम का यह शख्स एक अनोखा ‘बिज़नेस’ लेकर खड़ा है. वह प्रोफेशनल तरीके से लोगों के दुख और परेशानियां सुनने के काम को एक सेवा और कमाई का जरिया बना चुका है.

अनोखा ‘रेट कार्ड’ और सोशल मीडिया हलचल

पृथ्वीराज बोहरा का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक पोस्टर थामे नजर आता है. इस पोस्टर पर लिखा है कि वह लोगों की परेशानियां सुनने के लिए उपलब्ध है. दिलचस्प बात यह है कि उसने अपनी ‘सर्विसेज’ के लिए एक बाकायदा रेट कार्ड भी तय कर रखा है, जिसे देखकर लोग दंग हैं.

---विज्ञापन---

सेवाओं की कीमत: ₹250 से ₹1000 तक

पृथ्वीराज ने अपनी फीस को दुख की गंभीरता के आधार पर बांटा है. छोटे-मोटे दुख के लिए ₹250 (हल्की-फुल्की बातचीत के लिए). गंभीर परेशानियां सुनने के लिए ₹500 (गहरी मानसिक उलझनों को सुनने के लिए). वहीं साथ बैठकर रोने के लिए ₹1000 (इमोशनल सपोर्ट और कंपनी देने के लिए) चार्ज है.

क्या वाकई लोग पैसे देते हैं?

जब पृथ्वीराज से पूछा गया कि क्या कोई वास्तव में अपनी बात सुनाने के लिए पैसे खर्च करता है, तो उसका जवाब ‘हाँ’ था. उसका कहना है कि भीड़भाड़ वाले इस शहर में कई लोग ऐसे हैं जिनके पास अपनी बात कहने के लिए कोई अपना नहीं है. वे अजनबियों को पैसे देकर अपना मन हल्का करना ज्यादा सुरक्षित और आसान समझते हैं.

मानसिक स्वास्थ्य और अकेलेपन पर बड़ी बहस

इस वीडियो ने बड़े शहरों में बढ़ते अकेलेपन (Loneliness) और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ‘बिना जज किए’ बात सुनने वाले की कमी लोगों को ऐसे विकल्पों की ओर ले जा रही है. यह इस बात का संकेत है कि आधुनिक समाज में संवाद और सहानुभूति (Empathy) कितनी महंगी होती जा रही है.

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

इंटरनेट पर इस पहल को लेकर लोग दो गुटों में बंट गए हैं. कुछ इसे “ईमानदार स्टार्टअप” और “बेहतरीन बिजनेस आइडिया” बता रहे हैं. उनका कहना है कि कम से कम कोई सुनने के लिए उपलब्ध तो है. कई लोगों ने इसे “मजबूरी का फायदा उठाना” करार दिया है. उनका कहना है कि दुख और सहानुभूति अब व्यापार बन गए हैं, जो समाज के लिए चिंताजनक है.

First published on: Mar 21, 2026 09:30 PM

Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 on Facebook, Twitter.