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Jugjugg Jeeyo movie review: करण के धर्मा प्रोडक्शन के लिए ‘गुड न्यूज़’ है ‘जुग-जुग जियो’

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यूं तो ट्रेलर देखकर हम और आप अंदाज़ा लगाते हैं कि कोई फिल्म देखें या ना देखें। मगर, लंबे वक्त के बाद जुग जुग जियो ऐसी फिल्म है, जो अपने ट्रेलर से बांधी उम्मीदों के साथ बोनस भी देती है।

शादी, प्यार और उसके बाद रिश्तों में आए रुखेपन से, एक दूसरे का साथ छोड़ने की ये कहानी आपको जोड़ती है। आम तौर पर तलाक जैसे टॉपिक पर संजीदा फिल्में बनती हैं, और आम तौर पर फिल्म के क्लाइमेक्स तक अपनी-अपनी गलतियां समझकर एक दूसरे के साथ ज़िंदगी बिताने वाले गुड नोट पर जाकर फिल्म ख़त्म होती है।

लेकिन जुग-जुग जियो की ये ख़ास बात है कि ये अपनी एक नई लकीर खींचती है। ट्रेलर में नीतू कपूर का एक डायलॉग है, कि रिश्ता टूटने की कोई एक वजह नहीं होती, बहुत सी अधूरी लड़ाईयों की थकान होती है…। इसके आगे नीतू कपूर के किरदार गीता सैनी ने अनजाने शख़्स से शादी और रिश्ते निभाते-निभाते आदत बन जाने की जो दलील दी है, वो जुग-जुग जियो की बुनियाद बन जाता है। ये फिल्म तीन अलग-अलग पीढियों की शादियों को अलग-अलग नज़रिए से परखती है और रिश्तों में पाने से ज़्यादा देने की वकालत करती है।

धर्मा प्रोडक्शन ने अपने पिछले मल्टीस्टारर फ्लॉप कलंक का इस फिल्म में मज़ाक भी उड़ाया है, ये सिखाता है, पिछली गलतियों से सीखना। जुग-जुग जियो इसी तर्ज़ पर आगे बढ़ती है। कहानी, शुरुआत में ही बहुत तेजी से आगे बढ़ती है पंजाब के पटियाला में बचपने से शुरु हुई कुकू और नैना की प्रेमकहानी से होती है, जो बहुत तेजी से शादी से आगे बढ़ते हुए, पांच साल बाद कनाडा के हाईराइज़ अपॉर्टमेंट में कुछ ही मिनट्स में पहुंच जाती है।

कुकू और नैना के बीच में बहुत कुछ बदल गया है। नैना एक बड़ी कंपनी में बडे ओहदे पर काम कर रही है, अब उसे कनाडा से न्यूयॉर्क में और भी ऊंची पोजिशन पर प्रमोशन मिला है। मगर कुकू से वो अब तक ये बात नहीं बता पाई है, क्योंकि उन दोनो के बीच एक अजीब सी खामोशी आ गई है। वजह कुकू की नाकामयाबी है, वो कनाडा के पब में बाउंसर है। अपनी नाकामयाबी का ज़िम्मेदार कुकू, नैना को मानता है। अपनी 5वीं वेडिंग एनीवर्सरी पर दोनो फैसला लेते हैं कि वो एक दूसरे से तलाक लेगें, तय होता है कि कुकू की बहन गिन्नी की शादी के बाद वो इस फैसले के बारे में सबको बताएंगे, लेकिन यहां पटियाला में तो मामला ही उल्टा है। कुकू के पापा भीम का अफेयर, उसी के स्कूल की मैथ टीचर – मीरा से चल रहा है। ये बात कुकू को तब पता चलती है, जब वो अपने पापा भीम को, अपने तलाक की बात बताने की तैयारी कर रहा था। उधर इन बातों से बेखकर गिन्नी, अपने मम्मी-पापा और भैया-भाभी को आईडल कपल मानते हुए, खुद को ऐसे शादी के तैयार कर रही है, जिसे उसका दिल नहीं चाहता, क्योंकि वो एक स्ट्रग्लर म्यूज़िशियन से प्यार करती है।

यहां रिश्तों का एक ऐसा बवंडर उठता है, जिसमें हर किसी के सामने आईना खड़ा हो जाता है। दूसरो को रिश्तों का पाठ पढ़ाने वाले हर किरदार को, अपने रिश्तों को दोबारा सिलना और संवारना है। ये कहानी आपको जितना संजीदा लग रही है, वो उतनी है कॉमेडी से भरपूर है। अनुराग सिंह की कहानी और ऋषभ शर्मा के डायलॉग्स ने फिल्म को एक लम्हे के लिए भी भारी नहीं होने दिया है। हांलाकि सेकेंड हॉफ़ में फिल्म को नतीजे तक पहुंचाने में तकरीबन 10 से 15 मिनट फिल्म लंबी ज़रूर हो गई, लेकिन जुग-जुग जियो ने नई पीढ़ी की समझ और पुरानी पीढ़ी के तजुर्बे के बीच एक रिफ्रेशिंग ताना-बाना बुना है और समझाया है कि रिश्ता आदत भले बन जाए, लेकिन टिकता तभी है, जब उसमें प्यार और भरोसा बना रहे।

अनुराग सिंह ने जुग-जुग जियो के लिए एक शानदार कहानी बुनी है, तो ऋषभ शर्मा ने उसमें इमोशन और कॉमेडी के डायलॉग्स की ऐसी छौंक लगाई है कि आप ये फिल्म एक मिनट के लिए भी भटकने नहीं देगी। डायरेक्टर राज मेहता की ये खूबी भी है कि वो संजीदा सब्जेक्ट को हंसी की डोज़ में पेश करते हैं। उनका ये फॉर्मुला गुड न्यूज़ के बाद जुग-जुग जियो में भी कामयाब रहा है।

परफॉरमेंस के तौर पर जुग-जुग जियो में हर एक्टर ने इतना शानदार काम किया है कि आप तय करने में कन्फ्यूज़ हो जाएंगे कि सबसे बेहतर कौन ?

बैक टू बैक फ्लॉप देने के बाद वरुण धवन ने कुकू बनकर रोमांस किया है, उदास हुए हैं, टूटे हैं, बिखरे हैं और कन्फ्यूज़ हुए हैं… मतलब ये उनकी सबसे लेयर्ड परफॉरमेंस है। कियारा आडवाणी अपने हर किरदार के साथ निखर रही हैं। नैना बनकर उन्होने इमोशनल सीन्स में ऐसा कमाल का काम किया है कि आप उनकी दाद देंगे। वैसे सबसे ज़्यादा तालियां अगर आपको जुग-जुग जियो में किसी के लिए बजानी है, तो वो हैं अनिल कपूर….। एक्टर के तौर पर वो गिरगिट हैं, जो रंग बदलते हैं, मतलब शानदार। नीतू कपूर को दोबारा बिग स्क्रीन पर देखना इमोशनल हैं, वो जुग-जुग जियो की इमोशनल स्ट्रेंथ हैं। मनीष पॉल ने जुग-जुग जियो में कॉमेडी की जो लड़ियां लगाई हैं, उसके धमाकों की ये बस शुरुआत भर है। प्राजक्ता कोली का बॉलीवुड डेब्यू बेहतरीन है।

जुग-जुग जियो के क्लाइमेक्स से आप भले ही पूरी तरह से कन्विंस ना हों, लेकिन ये फिल्म एक नया नज़रिया पेश करती है।

जुग-जुग जियो को 4 स्टार।

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