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आशा भोसले ऐसे बनी बॉलीवुड की ‘लिटिल मेलोडी क्वीन’, कहलाईं लता मंगेशकर की छाया

भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री की फेमस सिंगर आशा भोसले का निधन हो गया है. उन्होंने 92 साल की उम्र में अंतिम सांस ली है और दुनिया को अलविदा कह दिया है. सिंगर के निधन की जानकारी खुद उनके बेटे आनंद भोसले ने दी है. उनके निधन के बाद से म्यूजिक इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ पड़ी है. फैंस भी उनके जाने से खासा निराश हैं और उनके लिए दुआ कर रहे हैं. हालांकि क्या आज जानते हैं आशा भोसले म्यूजिक इंडस्ट्री की सबसे बड़ी सिंगर कैसे बनीं. चलिए जानते हैं.

आशा भोसले ने सिर्फ 9 साल की उम्र में 1943 में अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत की थी. लेकिन उनके करियर शुरू करने से पहले उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर म्यूजिक इंडस्ट्री में अपने पैर जमा चुकी थीं. लता मंगेशकर ज्यादातर म्यूजिक कंपोजर्स और फिल्म डायरेक्टर्स की पसंद बन चुकी थीं. लेकिन जब आशा ने म्यूजिक इंडस्ट्री में एंट्री ली तो उन्हें लता मंगेशकर की बहन का टैग मिला और यह उनके लिए चैलेंजिंग भी था. क्योंकि वह अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहती थीं. इसके बाद उन्होंने तमाम हिट गाने दिए, लेकिन फिर भी उन्हें शुरुआत में लता जैसी पहचान नहीं मिली. हालांकि धीरे-धीरे उन्होंने कुछ ऐसे गाने भी एक्सप्लोर किए, जिसमें न सिर्फ गायन बल्कि डांस तक शामिल था. जिस तरह से म्यूजिक कंपोजर्स ने लता मंगेशकर पर भरोसा जताया वैसे ही उन्होंने आशा पर भी भरोसा शुरू कर दिया और आशा ने अपने शानदार गायन से साबित कर दिया की वह कमाल है.

उन्होंने 'कारवां', पिया तू अब तो आ जा, ये मेरा दिल, दम मारो दम, ओ हसीना जुल्फों वाली, जैसे तमाम बेहतरीन गाने गाए, जो कि आज भी कई पार्टी की शान होते हैं. उनके ज्यादातर गाने उस दौर में नंबर वन डांस सॉन्ग हुआ करते थे. इतना ही नहीं हेलेन पर फिल्माया गया गाना 'पिया तू अब तो आजा', 'ये मेरा दिल', और 'ओ हसीना जुल्फों वाली’ खूब पसंद किया गया था. दोनों की जोड़ी सुपरहिट हो गई थी. एक ओर हेलेन के डांस मूव्स और आशा के गाने लोगों के फेवरेट बन गए थे.

80 के दशक तक कई लोगों को लगता था कि आशा सीमित तरह के गाने गा सकती हैं. हालांकि फिल्म उमराव जान के लिए उन्होंने ऐसे गाने गाए जो लोगों के जहन में बस गए. इस फिल्म में उन्होंने बेहद खूबसूरती से गजलें गाईं, जिसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया. इसके बाद 'मेरा कुछ सामान' जैसे इमोशनल गाने गाकर उन्होंने लोगों को खूब प्रभावित किया. इस गाने के लिए भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला था. आशा ने 80 के दशक में साबित कर दिया था वह सिर्फ पार्टी और डांसिंग सॉन्ग नहीं बल्कि इमोशनल गाने, गजलें भी बखूबी ढंग से गाना जानती हैं. साथ ही उन्होंने लोगों को भी गलत साबित कर दिया कि वह सिर्फ लता मंगेशकर की बहन नहीं है. उनकी अपनी एक अलग पहचान है और इस तरह से वह इंडस्ट्री की लिटिल मेलोडी क्वीन बन गईं.

बता दें कि आशा ने अपने करियर में 12000 गाने गाए थे. उन्होंने सिर्फ हिंदी भाषा में ही नहीं बल्कि मराठी, बंगाली और अन्य अलग भाषाओं के गानों में भी अपनी आवाज दी थी. इतनी संख्या में गाने गाने के कारण उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया था.

आशा की पर्सनल लाइफ पर नजर डालें तो उन्होंने सिर्फ 16 साल की उम्र में भागकर शादी की थी. उन्होंने परिवार के खिलाफ जाकर 31 साल के गणपतराव भोसले से शादी की थी. उनसे उनके तीन बच्चे हैं. हालांकि शादी के बाद आशा के ससुराल वाले उन्हें टॉर्चर करते थे, जिसके कारण उन्होंने पति का घर छोड़ दिया था और तीसरे बच्चे से प्रेग्नेंट आशा मायके आ गई थीं. जहां उनके परिवार ने उनका साथ दिया. इसके बाद 20 साल तक वह अकेले रहीं और 47 साल की उम्र में उन्होंने आर.डी बर्मन से शादी की.