---विज्ञापन---
‘Border 2’ को खा गई इस फिल्म की कहानी, ऑडियंस ने अचानक क्यों फेर लिया मुंह?

सनी देओल की 'बॉर्डर 2' का इंतजार किसी त्यौहार से कम नहीं था, लेकिन सिनेमाघरों में जो हुआ उसने सबको चौंका दिया. दरअसल, रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर' ने अपनी जबरदस्त कहानी और सस्पेंस से ऑडियंस का दिल पहले ही जीत लिया था. जब लोग 'धुरंधर' के लेवल का सिनेमा देखकर 'बॉर्डर 2' देखने पहुंचे, तो उन्हें भारी निराशा हाथ लगी. सालों पुरानी यादों का सहारा लेकर आई यह फिल्म कहानी के मामले में रणवीर की 'धुरंधर' के सामने फीकी पड़ गई, जिससे फैंस ने अचानक अपना रुख बदल लिया.

'धुरंधर' की कहानी का जादू- रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर' की स्क्रिप्ट इतनी टाइट और इंगेजिंग थी कि दर्शकों को एक पल के लिए भी पलक झपकाने का मौका नहीं मिला. उसकी तुलना में 'बॉर्डर 2' की कहानी बहुत ही सुस्त और प्रेडिक्टेबल (अनुमानित) लगी. लोगों को लगा कि 'धुरंधर' के मुकाबले इसमें वो 'दम' नहीं है जो कुर्सी से बांधे रखे.

एक्टिंग और किरदार में गहराई की कमी- जहां 'धुरंधर' में रणवीर सिंह और अन्य कलाकारों ने अपने किरदारों में जान फूंक दी थी, वहीं 'बॉर्डर 2' में कलाकारों के बीच वो तालमेल नज़र नहीं आया. सनी देओल के अलावा बाकी स्टारकास्ट फीकी लगी. दर्शकों को लगा कि मेकर्स ने कहानी से ज्यादा फिल्म की चमक-धमक पर पैसा खर्च किया है.

घिसा-पिटा ट्रीटमेंट- 'धुरंधर' ने मॉडर्न सिनेमा का परिचय दिया, जबकि 'बॉर्डर 2' अभी भी 90 के दशक के फॉर्मूले पर अटकी दिखी. आज की स्मार्ट ऑडियंस को घिसे-पिटे डायलॉग्स और ओवर-द-टॉप ड्रामा रास नहीं आ रहा. लोगों का कहना है कि अगर फिल्म का नाम 'बॉर्डर' है, तो उसे उस लेवल का होना भी चाहिए था.

गलत टाइमिंग और हाई कम्पैरिजन- 'धुरंधर' की सफलता ने दर्शकों के स्टैंडर्ड को काफी ऊपर कर दिया था. 'बॉर्डर 2' के मेकर्स इस बात को भांप नहीं पाए. जैसे ही फिल्म रिलीज हुई, सोशल मीडिया पर इसकी तुलना 'धुरंधर' के मास्टरक्लास डायरेक्शन से होने लगी और यहीं 'बॉर्डर 2' मात खा गई.