प्रतीक गांधी और पत्रलेखा की लीड रोल निभाने वाली फिल्म ‘फुले’ की रिलीज तय तारीख पर नहीं हो पाई है। यह फिल्म शुक्रवार को सिनेमाघरों में आने वाली थी, लेकिन अब इसे दो हफ्तों के लिए टाल दिया गया है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने कुछ सीन और संवादों पर आपत्ति जताई है, जिसके कारण फिल्म की टीम को बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं। आइए जानते हैं कि किस-किस सीन पर आपत्ती जताई गई है और इसके पीछे के कारण क्या हैं?
किन-किन सीन पर जताई गई आपत्ति?
CBFC ने फिल्म के कुछ वॉयसओवर और डायलॉग्स को हटाने या बदलने के लिए कहा है। इनमें विशेष रूप से जाति व्यवस्था से जुड़े संवाद शामिल हैं। एक सीन में 'मांग', 'महार' और 'पेशवाई' जैसे शब्दों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही 'झाड़ू लिए आदमी' वाले सीन को बदलकर 'सावित्रीबाई पर गोबर फेंकते लड़कों' के सीन से रिप्लेस करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही एक डायलॉग जिसमें कहा गया था, ‘जहां क्षुद्रों को झाड़ू बांधकर चलना चाहिए’, उसे बदलकर ‘क्या यही हमारी सबसे दूरी बनाके रखनी चाहिए’ किया गया है। इसके साथ ही एक और डायलॉग, ‘3000 साल पुरानी गुलामी’ को ‘कई साल पुरानी है’ में बदला गया है। वहीं 43 सेकंड का एक वॉयसओवर जिसमें ‘यहां 3 एम है... और हम वही करने जा रहे हैं’ कहा गया था, उसे भी हटाने को कहा गया है। फिल्म में इन्ही सीन्स में बदलाव लाने के निर्देश दिए गए हैं उसके बाद में ही रिलीज होने को तैयार होगी।
फिल्म 19वीं सदी के समाज सुधारकों जैसे महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले की लाइफ पर बेस्ड है। इसमें उस दौर के उनके सामाजिक संघर्षों पर आधारित है। इसमें जातिगत भेदभाव, महिलाओं की शिक्षा, और विधवा पुनर्विवाह जैसे मुद्दों को दिखाया गया है। अनंत महादेवन द्वारा निर्देशित, यह फिल्म डांसिंग शिवा फिल्म्स और किंग्समेन प्रोडक्शंस द्वारा बनाई गई है और जी स्टूडियो इसे रिलीज करेगा।
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