Elvish Yadav News: फेमस यूट्यूबर और ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ के विजेता एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से एक बहुत बड़ी कानूनी जीत मिली है. साल 2023 के बहुचर्चित ‘स्नेक वेनम’ (सांप के जहर) मामले में अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) को रद्द कर दिया है. न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली और कानूनी प्रक्रियाओं पर अहम टिप्पणी की है.
NDPS एक्ट के तहत आरोपों को माना आधारहीन
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NDPS एक्ट, 1985 की धारा 2(23) के तहत जिस पदार्थ (सांप के जहर) की बात की जा रही है, वह कानून की निर्धारित सूची में शामिल ही नहीं है. अदालत ने यह भी नोट किया कि एल्विश यादव के पास से व्यक्तिगत रूप से कोई बरामदगी नहीं हुई थी. चार्जशीट में लगाए गए “सहयोगी के जरिए ऑर्डर देने” के आरोपों को अदालत ने कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं माना.
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की प्रक्रिया का उल्लंघन
कोर्ट ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 55 का हवाला देते हुए कहा कि इस कानून के तहत कोई भी कार्रवाई केवल एक ‘अधिकृत अधिकारी’ की लिखित शिकायत पर ही शुरू की जा सकती है. क्योंकि मौजूदा एफआईआर इस कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करती थी, इसलिए इसे विधिसम्मत नहीं माना जा सकता.
वीडियो शूट और फाजिलपुरिया का कनेक्शन
एल्विश की ओर से दलील दी गई कि वे केवल गायक फाजिलपुरिया के निमंत्रण पर एक वीडियो शूट के लिए गए थे. वकील ने दावा किया कि न तो वहां कोई रेव पार्टी हो रही थी और न ही मादक पदार्थों का सेवन किया जा रहा था. लैब रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि बरामद किए गए सांप विषैले नहीं थे और एल्विश घटना के समय वहां मौजूद भी नहीं थे.
“लोकप्रिय लोगों पर बड़ी जिम्मेदारी” – कोर्ट की सख्त टिप्पणी
भले ही कोर्ट ने एफआईआर रद्द कर दी हो, लेकिन पिछली सुनवाई में अदालत ने बेहद सख्त रुख अपनाया था. कोर्ट ने कहा था कि अगर लोकप्रिय हस्तियां सांपों जैसे मूक जीवों का इस तरह इस्तेमाल करती हैं, तो समाज में गलत संदेश जाता है. अदालत ने सवाल उठाया था कि क्या किसी को भी जानवरों के साथ इस तरह खेलने की अनुमति दी जा सकती है?