जानी-मानी पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का निधन हो गया है. उन्होंने 70 साल की उम्र में 3:15 बजे आखिरी सांस ली. वह लंबे समय से बीमार थीं और उनका इलाज चल रहा था. हालांकि, वह बीमारी से जंग हार गईं और दुनिया को अलविदा कह गईं.
तीजन बाई ने अपनी बेहतरीन गायकी के दम पर दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बनाई. उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन परंपरा को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में नई पहचान दिलाई. उनके निधन से लोक संगीत और कला जगत को बड़ा नुकसान हुआ है.
कौन थीं तीजन बाई
8 अगस्त 1956 को तीजन बाई का जन्म भिलाई के पास स्थित गनियारी गांव में हुआ था. जानकारी के मुताबिक, उन्होंने महज 13 साल की उम्र में पहली बार 10 रुपये के लिए पंडवानी गाया था. उन्होंने कापालिक शैली में पंडवानी गायन किया, जिसने उन्हें अलग पहचान दिलाई. अपनी अनोखी गायकी और दमदार आवाज के कारण वह जल्द ही लोगों के बीच पॉपुलर हो गईं और उन्हें अलग-अलग जगहों पर पंडवानी गाने के लिए बुलाया जाने लगा.
पंडवानी में माहिर थीं तीजन
तीजन बाई पहली महिला कलाकार थीं, जिन्होंने कापालिक शैली में खड़े होकर पंडवानी को गाया. उस दौर में महिलाओं के बीच वेदमती शैली ज्यादा पॉपुलर थी, जिसमें कलाकार बैठकर पंडवानी गाते थे. वहीं, तीजन बाई ने खड़े होकर इसे गाया और नई परंपरा शुरू की और अलग पहचान बनाई.
बता दें कि तीजन बाई महाभारत के किरदारों और कहानियों को बेहद प्रभावशाली ढंग से मंच पर पेश करती थीं. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने भी पंडवानी गाई थी. इसके बाद उन्हें देशभर में नई पहचान मिली और फिर उन्होंने दुनिया भर में अपनी कला का लोहा मनवाया. उन्हें साल 1988 में पद्मश्री, साल 2003 में पद्म भूषण और साल 2019 में पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था.
कैसी थी तीजन की पर्सनल लाइफ
अगर उनके निजी जीवन की बात करें, तो द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक उनकी शादी महज 12 साल की उम्र में हो गई थी. शादी के बाद 13 साल की उम्र में उन्होंने पंडवानी गायन शुरू किया. हालांकि, एक महिला होकर पंडवानी गाने के कारण उन्हें पारधी समुदाय से बहिष्कृत कर दिया गया था. इसके चलते उन्हें अपने पति का घर भी छोड़ना पड़ा. जिंदगी जीने के लिए उन्होंने दूसरों के घरों में काम किया. इतना ही नहीं, कई बार उन्हें लोगों से खाना मांगकर भी खाया. अपने जीवन में उन्होंने दो शादियां की थीं.