Khushboo Patani On Iran-Israel War: ईरान में सत्ता परिवर्तन और युद्ध के मंडराते बादलों के बीच देश-दुनिया में विरोध और मातम का माहौल है. लेकिन पूर्व मेजर खुशबू पाटनी ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘धार्मिक चश्मे’ से देखने वालों को कड़ी चेतावनी दी है. खुशबू, जो स्वयं भारतीय सेना का हिस्सा रही हैं, ने साफ किया है कि यह कोई पवित्र युद्ध नहीं, बल्कि शुद्ध रूप से जियोपॉलिटिक्स और पावर गेम है. उनका सोशल मीडिया पोस्ट इस समय तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने भारतीयों को किसी दूसरे देश की राजनीति के लिए आपस में न लड़ने और केवल अपने राष्ट्र ‘भारत’ के प्रति वफादार रहने की सलाह दी है.
‘धर्म नहीं, यह सत्ता का खेल है’
खुशबू ने स्पष्ट रूप से लिखा कि इसे धार्मिक युद्ध (Religious War) बनाकर पेश करना गलत है. उनके अनुसार, यह पूरी तरह से क्षेत्रीय प्रभाव, सैन्य रणनीति और वैश्विक गठबंधनों का मामला है. फैसले तेल, सुरक्षा और शक्ति संतुलन को देखकर लिए जाते हैं, न कि किसी धर्म विशेष के लिए. पूर्व मेजर ने भारतीयों को याद दिलाया कि ईरान हमारा देश नहीं है. उन्होंने कहा कि किसी विदेशी मुल्क की राजनीति की वजह से अपने ही देशवासियों से लड़ना मूर्खता है. मुश्किल समय में कोई बाहरी देश मदद के लिए नहीं आता, केवल अपना देश और देशवासी ही साथ खड़े होते हैं.
भावुकता से बचें, समझदारी दिखाएं
खुशबू ने लोगों को भावनाओं में बहकर सोशल मीडिया पर पक्ष न लेने की सलाह दी. उन्होंने लिखा, “जब तक भारत इस जंग में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, हमें इसमें भावनात्मक रूप से कूदने की कोई जरूरत नहीं है.” युद्ध राजनीतिक होता है, व्यक्तिगत नहीं.
सोशल मीडिया के प्रोपेगेंडा पर प्रहार
उन्होंने उन लोगों को भी जवाब दिया जो सोशल मीडिया पर इसे मजहबी रंग देकर नफरत फैला रहे हैं. खुशबू के मुताबिक, हकीकत आम लोगों की समझ से कहीं ज्यादा जटिल है और इसे ‘धर्म की लड़ाई’ बनाकर बेचना एक सोची-समझी साजिश है.
देशभक्ति और फिटनेस के लिए मशहूर
खुशबू पाटनी अक्सर अपनी फिटनेस और सैन्य पृष्ठभूमि की वजह से चर्चा में रहती हैं. वर्दी उतारने के बाद भी वे अक्सर राष्ट्रीय मुद्दों पर मुखर रहती हैं. इस बार भी उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया भले ही युद्ध में बंट जाए, लेकिन एक भारतीय के लिए उसकी प्राथमिकता हमेशा अपना देश होनी चाहिए.