फिल्मों में पर्दे पर दिखने वाले खूबसूरत सीन के पीछे कलाकारों को कई बार जान जोखिम में डालनी पड़ती थी। ऐसा ही एक खौफनाक किस्सा दिग्गज एक्ट्रेस वैजयंतीमाला की जिंदगी से जुड़ा है। अपनी ऑटोबायोग्राफी ‘बॉन्डिंग… ए मेमॉयर’ में उन्होंने बताया कि एक तमिल फिल्म की शूटिंग के दौरान कश्मीर की डल झील में सीन करते वक्त वह अचानक पानी में गिर गई थीं और डूबने लगीं। सेट पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई, तभी कैमरा संभाल रहे कैमरामैन ने बिना देर किए झील में छलांग लगा दी और उन्हें बचाकर बाहर निकाला। हादसे के बाद उन्हें अस्पताल भी ले जाना पड़ा। इसके अलावा 1966 की फिल्म ‘सूरज’ की शूटिंग के दौरान डांस करते समय लकड़ी के प्लेटफॉर्म से निकली एक कील उनके पैर में घुस गई थी, जिससे उन्हें गंभीर चोट लगी। 13 अगस्त 1933 को मद्रास में जन्मीं वैजयंतीमाला बचपन से भरतनाट्यम सीख रही थीं और आगे चलकर यही उनकी पहचान बनी। ‘नागिन’, ‘देवदास’, ‘नया दौर’, ‘मधुमती’, ‘साधना’, ‘गंगा जमुना’ और ‘संगम’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा की शीर्ष अभिनेत्रियों में शामिल किया। कला में उनके योगदान के लिए उन्हें 1968 में पद्म श्री और 2024 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।