बॉलीवुड में दोस्ती के कई किस्से मशहूर हैं, लेकिन फिरोज़ खान और विनोद खन्ना की दोस्ती से जुड़ा एक ऐसा संयोग है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया। दोनों सितारे न सिर्फ इंडस्ट्री के जिगरी दोस्त थे, बल्कि उनकी जिंदगी और मौत में भी कई चौंकाने वाली समानताएं देखने को मिलीं। फिरोज़ खान और विनोद खन्ना की दोस्ती साल 1976 में फिल्म शंकर शंभू के सेट पर शुरू हुई थी। इसके बाद दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया, जिनमें कुर्बानी सबसे चर्चित रही। उनकी दोस्ती, स्टाइल और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस की चर्चा इंडस्ट्री में हमेशा होती रही। दोनों कलाकारों की जिंदगी में एक बड़ा मोड़ तब आया जब 1982 में विनोद खन्ना फिल्मी दुनिया छोड़कर ओशो आश्रम चले गए। करीब पांच साल बाद वापसी करने पर उन्हें काम पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उस दौर में फिरोज़ खान ने उनका साथ दिया और अपनी फिल्म दयावान में उन्हें अहम भूमिका दी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों दोस्तों का निधन एक ही तारीख, 27 अप्रैल को हुआ। फिरोज़ खान का निधन 27 अप्रैल 2009 को 69 वर्ष की उम्र में लंग कैंसर के कारण हुआ था। वहीं विनोद खन्ना ने 27 अप्रैल 2017 को 70 वर्ष की उम्र में ब्लैडर कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद अंतिम सांस ली। इतना ही नहीं, दोनों की शादीशुदा जिंदगी में भी समानता रही। फिरोज़ खान और उनकी पत्नी सुंदरी खान का तलाक 1985 में हुआ, जबकि उसी साल विनोद खन्ना और उनकी पत्नी गीतांजलि भी अलग हो गए थे। यही वजह है कि इन दोनों दोस्तों की कहानी आज भी बॉलीवुड के सबसे अनोखे संयोगों में गिनी जाती है।

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