बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का प्रतिष्ठित बंगला 'आशीर्वाद' एक बार फिर चर्चा में है। वर्षों से इस बंगले को लेकर सोशल मीडिया और कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इसे 'मनहूस', 'शापित' और 'भूतिया' बताए जाने के दावे किए जाते रहे हैं। हालांकि अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने ऐसे दावों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि किसी व्यक्ति की संपत्ति को बिना किसी ठोस सबूत के 'हॉन्टेड', 'शापित' या 'मनहूस' बताकर उसकी छवि खराब नहीं की जा सकती। यह फैसला बंगले के मौजूदा मालिक शशि शेट्टी की याचिका पर सुनाया गया। शशि शेट्टी ने साल 2012 में राजेश खन्ना के निधन के बाद यह संपत्ति खन्ना परिवार से करीब 90 करोड़ रुपये में खरीदी थी। इसके बाद पुराने बंगले को तोड़कर उसकी जगह छह मंजिला आलीशान इमारत बनाई गई, लेकिन 'आशीर्वाद' नाम बरकरार रखा गया। दरअसल, इस बंगले का इतिहास काफी चर्चित रहा है। सबसे पहले अभिनेता भारत भूषण इसके मालिक थे, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते उन्हें इसे बेचना पड़ा। बाद में अभिनेता राजेंद्र कुमार ने इसे खरीदा और यहां रहने के दौरान उन्हें लगातार सफल फिल्में मिलीं। इसके बाद राजेश खन्ना ने यह बंगला खरीदा और इसका नाम 'आशीर्वाद' रखा। समय के साथ उनके करियर में भी उतार-चढ़ाव आए, जिसके बाद इस बंगले को लेकर कई तरह की अफवाहें फैल गईं। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद 'आशीर्वाद' को 'भूतिया' या 'मनहूस' कहकर प्रचारित करने पर रोक लग गई है।

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