अपनी मखमली आवाज़ और सदाबहार गज़लों से करोड़ों दिलों को सुकून देने वाले दिवंगत गजल गायक जगजीत सिंह की निजी जिंदगी गहरे दुखों से भरी रही। मंच पर लोगों के दर्द को आवाज़ देने वाले जगजीत सिंह खुद ऐसी त्रासदियों से गुज़रे, जिनसे वह कभी पूरी तरह उबर नहीं सके। 27 जुलाई 1990 को उनके 20 वर्षीय बेटे विवेक सिंह की लंदन में एक सड़क हादसे में मौत हो गई। इस हादसे ने जगजीत सिंह और उनकी पत्नी चित्रा सिंह को पूरी तरह तोड़ दिया। बेटे के निधन के बाद जगजीत ने कुछ समय के लिए गायकी से दूरी बना ली, जबकि चित्रा सिंह ने हमेशा के लिए गाना छोड़ दिया। फिल्ममेकर महेश भट्ट ने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि विवेक का पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए जगजीत सिंह को अधिकारियों को रिश्वत तक देनी पड़ी थी। इस दर्द से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि चित्रा सिंह की पहली शादी से हुई बेटी मोनिका ने आत्महत्या कर ली। चित्रा सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उस समय जगजीत अमेरिका दौरे पर थे, लेकिन खबर मिलते ही उन्होंने सभी कार्यक्रम रद्द कर भारत लौटने का फैसला किया। बेटी की मौत ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया। 8 फरवरी 1941 को जन्मे जगजीत सिंह ने 'होठों से छू लो तुम', 'कागज़ की कश्ती', 'कोई फ़रियाद' और 'चिट्ठी ना कोई संदेश' जैसी अमर गज़लों से अपनी अलग पहचान बनाई। 10 अक्टूबर 2011 को ब्रेन हैमरेज के बाद उनका निधन हो गया।

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