फिल्म और थिएटर जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मराठी रंगमंच की दिग्गज अभिनेत्री, निर्देशक और प्रोड्यूसर विजया मेहता का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। लंबी बीमारी के बाद उन्होंने 30 जून की रात अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से थिएटर और फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। थिएटर की दुनिया में विजया मेहता को प्यार से "बाई" कहा जाता था। यह सिर्फ एक संबोधन नहीं, बल्कि उनके प्रति सम्मान, स्नेह और विश्वास का प्रतीक था। उन्होंने न केवल कई यादगार नाटक निर्देशित किए, बल्कि कलाकारों की पूरी पीढ़ी तैयार की। उनके निर्देशन, सोच और मंच पर कहानी कहने की शैली ने भारतीय रंगमंच को नई पहचान दी। उनके निधन पर अभिनेता अनुपम खेर ने गहरा दुख जताते हुए उन्हें भारत की महानतम थिएटर हस्तियों में से एक बताया। वहीं अभिनेता विजय केनकरे ने कहा कि विजया मेहता सिर्फ उनकी गुरु नहीं, बल्कि उनके जीवन का अहम हिस्सा थीं। माना जाता है कि अभिनेता नाना पाटेकर के अभिनय को निखारने में भी उनका बड़ा योगदान रहा। 4 नवंबर 1934 को गुजरात में जन्मीं विजया मेहता ने मुंबई यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने इब्राहिम अल्काज़ी और आदि मर्जबान से अभिनय और निर्देशन की बारीकियां सीखीं। 1960 के दशक में विजय तेंदुलकर, श्रीराम लागू और अरविंद देशपांडे के साथ मिलकर उन्होंने 'रंगायन' थिएटर ग्रुप की स्थापना की, जिसने भारतीय थिएटर को नई दिशा और नई सोच दी।

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