हिंदी सिनेमा के महान फिल्ममेकर गुरु दत्त की मौत आज भी सबसे चर्चित रहस्यों में गिनी जाती है। 10 अक्टूबर 1964 को महज 39 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। 62 साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनकी मौत आत्महत्या थी या हादसा, इस पर बहस आज भी जारी है। गुरु दत्त ने अपने करियर में प्यासा, कागज़ के फूल और साहिब बीबी और गुलाम जैसी यादगार फिल्में दीं, लेकिन निजी जिंदगी लगातार परेशानियों से घिरी रही। उनकी शादी मशहूर गायिका गीता दत्त से हुई थी। शुरुआती वर्षों में दोनों का रिश्ता अच्छा रहा, लेकिन समय के साथ दूरियां बढ़ती गईं। इन मतभेदों की एक वजह वहीदा रहमान के साथ गुरु दत्त की नजदीकियों को भी माना जाता है। बताया जाता है कि रिश्तों में तनाव बढ़ने के बाद गीता दत्त तीनों बच्चों को लेकर अलग रहने लगी थीं। लेखक यासिर उस्मान की किताब Guru Dutt: An Unfinished Story और गुरु दत्त के करीबी अबरार अलवी के अनुसार, निधन से एक दिन पहले गुरु दत्त ने गीता दत्त से फोन पर बेटी से मिलने की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया। अगली सुबह गुरु दत्त अपने कमरे में मृत पाए गए। उनके पास नींद की गोलियां और एक गिलास मिला था। इसके बाद उनकी मौत को आत्महत्या बताया गया, हालांकि कई लोगों ने इसे दुर्घटनावश ओवरडोज भी माना। उनकी आखिरी इच्छा अपनी छोटी बेटी को देखने की थी, जो हमेशा के लिए अधूरी रह गई।

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