बॉलीवुड में सुपरस्टार बनना हर एक्टर का सपना होता है, लेकिन विनोद खन्ना ने अपने करियर के पीक पर पहुंचकर ऐसी जिंदगी चुनी, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। 70 के दशक में विनोद खन्ना बॉलीवुड के बड़े सितारों में शुमार थे। उनकी एक्टिंग, स्टाइल और पर्सनैलिटी के लाखों लोग दीवाने थे। करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था, तभी उनकी जिंदगी में आध्यात्मिक गुरु ओशो की एंट्री हुई। विनोद खन्ना धीरे-धीरे अध्यात्म की ओर आकर्षित होने लगे और उन्होंने अपने शानदार फिल्मी करियर से दूरी बना ली। इसके बाद वह पुणे स्थित ओशो के आश्रम में रहने लगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आश्रम में उन्होंने माली का काम किया, बाथरूम साफ किए और बर्तन भी धोए। करीब 10 साल तक वह फिल्म इंडस्ट्री से दूर रहे। इस फैसले का असर उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ा। उस समय उनके बेटे अक्षय खन्ना और राहुल खन्ना छोटे थे। वहीं, पत्नी गीतांजलि के साथ भी उनके रिश्ते में दूरी बढ़ती गई और दोनों का तलाक हो गया। समय के साथ विनोद खन्ना ने ओशो का आश्रम छोड़कर बॉलीवुड में वापसी की। साल 1987 में फिल्म ‘इंसाफ’ से उन्होंने अपनी दूसरी पारी शुरू की और एक बार फिर दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई। इसके बाद उनकी जिंदगी में कविता आईं, जिनसे उन्होंने शादी की। दोनों के दो बच्चे साक्षी और श्रद्धा हुए। हालांकि, जिंदगी के आखिरी दौर में विनोद खन्ना कैंसर से जूझे। बीमारी के चलते उनकी हालत काफी बिगड़ गई थी। 27 अप्रैल 2017 को 70 साल की उम्र में इस दिग्गज अभिनेता का निधन हो गया।