Urvashi Dholakia Family: 'कसौटी जिंदगी की' और 'नागिन 6' जैसे हिट टीवी शोज में नजर आ चुकीं पॉपुलर एक्ट्रेस उर्वशी ढोलकिया एक बार फिर सुर्खियों में छाई हैं. इस बार एक्ट्रेस अपने किसी शो या प्रोजेक्ट को लेकर नहीं, बल्कि अपनी निजी जिंदगी की वजह से चर्चा में हैं. दरअसल, हाल ही में एक्ट्रेस ने अपनी लाइफ के सबसे इमोशनल चैप्टर के बारे में खुलकर बात की है. इस दौरान उन्होंने बताया कि उन्हें अपने पिता को अंतिम विदाई देने में पूरे 16 साल लग गए. उर्वशी ने यह भी बताया कि हाल ही में उन्होंने अपने दिवंगत पिता का अंतिम संस्कार किया है. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर मामला क्या है.
पिता का निधन...
उर्वशी ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर कई नए पोस्ट शेयर किए हैं, जिनमें उन्होंने बताया कि हाल ही में वह हरिद्वार गई थीं और वहां अपने दिवंगत पिता का अंतिम संस्कार किया. उर्वशी ने बताया कि उनके पिता का निधन 2010 में हो गया था, लेकिन वह उनकी मौत की सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रही थीं और न ही उन्हें अलविदा कहने के लिए तैयार थीं.
मन और आत्मा को शांति…
हरिद्वार यात्रा की तस्वीरें और कुछ खास पल शेयर करते हुए उर्वशी ने कहा कि इस अनुभव से उनके मन और आत्मा को शांति मिली है. लोग अक्सर अपनों को याद करते हुए आंसू बहाते हैं, लेकिन अब उन्हें उम्मीद है कि जब वह अपने पिता को याद करेंगी तो उनके आंसू खुशी के होंगे. यह विदाई हमेशा के लिए नहीं थी, बल्कि फिर मिलने तक के लिए अलविदा कहने का सिर्फ एक पल था.
मुझे 16 साल लग गए…
इस पोस्ट को शेयर करते हुए उर्वशी ने एक लंबा कैप्शन भी लिखा. उन्होंने लिखा, 'मेरे लिए ये एक बेहद जरूरी और खास अनुभव है. इस मुकाम तक पहुंचने में मुझे 16 साल लग गए, सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं जाने देने के लिए तैयार नहीं थी! जब 2010 में मेरे पिता का देहांत हुआ, तब मैं जीवन की सच्चाई को समझ नहीं पा रही थी और शायद इसीलिए मैंने इसे स्वीकार नहीं किया! मां गंगा वह स्थान है जहां लोग आखिर में आकर विश्राम करते हैं, इसलिए मैं अपने पिता को अंतिम विदाई दे रही हूं और मेरी यही कामना है कि उन्हें शांति मिले.'
मैं खुशी के आंसू…
उर्वशी ने आगे कहा, 'इतने सालों तक मैंने अपने दिल और आत्मा में बेचैनी को चुपचाप सहा, लेकिन हरिद्वार की इस यात्रा ने मुझे शांति दी है और मेरे आंसू पोंछ दिए हैं. हालांकि इंसान होने के नाते हम याद में रोते हैं, लेकिन अब से मैं खुशी के आंसू बहाऊंगी. यह हमेशा के लिए अलविदा नहीं है. यह बस फिर मिलने तक का समय है. हरकीपौड़ी गंगा.'