Udta Teer Review: सोचिए, एक शख्स की याददाश्त चली जाए और उसके बाद उसकी जिंदगी में ऐसी उथल-पुथल मचे कि हर नया कदम उसे किसी दूसरी मुसीबत में डाल दे. ऊपर से मामला जासूसी का हो, रोमांस भी हो और हर थोड़ी देर में कहानी ऐसा मोड़ ले कि दर्शक सोचने लगें कि अब आगे क्या होगा? आयुष्मान खुराना की 'उड़ता तीर' इसी दिलचस्प अंदाज के साथ मनोरंजन करने की कोशिश करती है.

आकाश ए कौशिक के निर्देशन में बनी इस फिल्म में आयुष्मान विक्रांत के किरदार में हैं. याददाश्त खोने के बाद वह ऐसी परिस्थितियों में फंस जाता है, जहां गलतफहमियां और रहस्य उसकी मुश्किलें लगातार बढ़ाते रहते हैं. फिल्म की कहानी कॉमेडी, रोमांस और सस्पेंस के बीच अपना रास्ता तलाशती है.

हर थोड़ी देर में नया ट्विस्ट, यही है फिल्म का गेम

'उड़ता तीर' की खासियत यह है कि कहानी लंबे समय तक एक ही अंदाज में नहीं चलती. दर्शक जैसे ही किसी घटना को समझने लगते हैं, कोई नया खुलासा सामने आ जाता है. कई बार हालात जितने गंभीर दिखाई देते हैं, उनका नतीजा उतना ही मजेदार निकलता है.

फिल्म में 'धुरंधर' से जुड़े Danish Iqbal, Salim Siddiqui और Naseem Mughal भी नजर आते हैं. इन कलाकारों की मौजूदगी उन दर्शकों का ध्यान खींच सकती है, जो 'धुरंधर' की कास्ट से परिचित हैं. हालांकि, यहां कहानी का अपना अलग मिजाज है, जिसमें कॉमेडी और रहस्य को साथ लेकर चलने की कोशिश की गई है.

आयुष्मान खुराना ने अपनी अदाकारी से जमाया रंग

आयुष्मान खुराना इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं. उन्हें ऐसे किरदार निभाने में महारत हासिल है, जो आम परिस्थितियों में भी कुछ अलग तरह की मुश्किलों में फंस जाते हैं. विक्रांत की परेशानी, उसकी घबराहट और बदलते हालात पर उसकी प्रतिक्रियाओं को आयुष्मान ने सहज अंदाज में पेश किया है.

उनकी कॉमिक टाइमिंग कई दृश्यों को खास बनाती है. वह केवल संवादों के सहारे हंसाने की कोशिश नहीं करते, बल्कि चेहरे के भाव और छोटे-छोटे रिएक्शन से भी हास्य पैदा करते हैं. यही स्वाभाविकता उनके अभिनय को प्रभावशाली बनाती है. सस्पेंस वाले दृश्यों में भी वह किरदार की उलझन को बनाए रखते हैं, जिससे कहानी का मनोरंजक पक्ष मजबूत होता है.

सारा अली खान यामिनी के किरदार में कहानी को ऊर्जा देती हैं और रोमांटिक ट्रैक को आगे बढ़ाती हैं. राम कपूर, राहुल बोस, सुहैल नैय्यर, बृजेंद्र काला, गुलशन ग्रोवर और रघुबीर यादव जैसे कलाकार फिल्म को एक मजबूत सहायक कास्ट देते हैं. सुप्रिया पिलगांवकर कहानी में पारिवारिक भावनाओं का पहलू जोड़ती हैं.

कहां कमजोर पड़ती है फिल्म?

फिल्म का कॉन्सेप्ट दिलचस्प है, लेकिन कुछ जगह पटकथा घटनाओं को और स्पष्ट तरीके से पेश कर सकती थी. कुछ मोड़ों को बेहतर तरीके से समझाया जाता, तो कहानी का प्रभाव और बढ़ता. इसके बावजूद लगातार आते ट्विस्ट दर्शकों की उत्सुकता को बनाए रखने में मदद करते हैं.

सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग कहानी की गति के अनुरूप हैं. बैकग्राउंड स्कोर सस्पेंस को उभारता है, जबकि सचिन-जिगर का संगीत फिल्म के मनोरंजन वाले अंदाज को सहारा देता है.

देखें या नहीं?

अगर आप ऐसी फिल्म की तलाश में हैं, जिसमें दिमाग लगाने वाला रहस्य भी हो और खुलकर हंसने के मौके भी, तो 'उड़ता तीर' आपको पसंद आ सकती है. आयुष्मान खुराना की सहज अदाकारी, उनकी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और लगातार बदलते घटनाक्रम फिल्म को मनोरंजक बनाते हैं.

कुछ कमियों के बावजूद, यह फिल्म हल्के-फुल्के मनोरंजन के लिए एक अच्छा विकल्प है.