Pehla Pyaar Doosri Baar Review: कहते हैं पहला प्यार कभी भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन अगर दस साल बाद वही क्रश आपके सामने आ जाए, तो क्या दिल फिर से धड़कने लगेगा? इसी दिलचस्प ख्याल को लेकर आई है 'पहला प्यार दूसरी बार.' फिल्म में प्यार है, दोस्ती है, कन्फ्यूजन है और ऐसे डॉयलोग्स भी हैं, जो आपको मुस्कुराने पर मजबूर कर सकते हैं. लव रंजन के अंदाज वाली रिलेशनशिप कॉमेडी में नए कलाकारों की टोली ने अच्छी जान डाली है.

कहानी में कितना है दम?

कहानी तीन दोस्तों की है, जो स्कूल के दिनों के बाद अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन दिल के किसी कोने में पहली मोहब्बत की यादें अब भी बाकी हैं. दस साल बाद स्कूल रीयूनियन उन्हें अपने पुराने क्रश से मिलने और अधूरी भावनाओं को एक मौका देने का अवसर देता है.

अब पुराना प्यार वापस मिलेगा या जिंदगी कोई नया ट्विस्ट लेकर आएगी? इसी सवाल के साथ कहानी आगे बढ़ती है. दोस्तों की मस्ती, प्यार को लेकर उनकी उलझनें और बदलते रिश्ते फिल्म में कॉमेडी और इमोशन दोनों लेकर आते हैं.

पंचलाइन और दोस्ती हैं फिल्म की जान

फिल्म में कई ऐसे संवाद हैं, जो इसकी सबसे बड़ी खूबी बनकर सामने आते हैं. रिश्तों में होने वाली नोकझोंक, प्यार में पड़ने के बाद बदलता रिश्ता और दोस्तों के बीच होने वाली मजेदार बातचीत कहानी को हल्का-फुल्का बनाए रखती है.

तीनों दोस्तों की केमिस्ट्री भी अच्छी है. एक-दूसरे की खिंचाई करना हो या मुश्किल वक्त में साथ देना, उनकी दोस्ती कहानी को एक इमोशनल कनेक्शन देती है. फिल्म आज की पीढ़ी के रिश्तों और प्यार को लेकर उनकी सोच को भी छूती है.

हालांकि, कुछ जगहों पर कहानी अनुमान के मुताबिक चलती है. पुराने क्रश के साथ रोमांस को दोबारा स्थापित करने के लिए और मजबूत भावनात्मक आधार की जरूरत थी. यही वजह है कि फिल्म के कुछ रोमांटिक पल उतना असर नहीं छोड़ते, जितनी उम्मीद की जाती है.

नए कलाकारों ने किया प्रभावित

स्पर्श वालिया, कुनाल वैद, सर्गुन कौर लूथरा, अलीशा चोपड़ा, साक्षी वैद्य और तुषार छिब्बर ने अपने किरदारों में ताजगी लाने की कोशिश की है. स्पर्श वालिया का अंदाज और स्क्रीन प्रेजेंस अच्छा है, वहीं कुनाल वैद भी अपने अभिनय से ध्यान खींचते हैं.

सर्गुन कौर लूथरा अपने आत्मविश्वास से प्रभावित करती हैं. बाकी कलाकार भी कहानी की युवा ऊर्जा को बनाए रखते हैं. सभी के बीच दोस्ती वाले दृश्य अच्छे लगते हैं, हालांकि कुछ रोमांटिक रिश्तों को और बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता था.

गाने भी हैं खास

फिल्म का म्यूजिक रोमांस और पुरानी यादों के माहौल को मजबूत करता है. गाने कहानी के साथ चलते हैं. म्यूजिक फिल्म के युवा अंदाज को और आकर्षक बनाता है.

निर्देशक अनुज सैनी ने कॉमेडी, दोस्ती और रोमांस को साथ लेकर चलने की कोशिश की है. फिल्म का क्लाइमैक्स भी अच्छा है और कहानी को एक अच्छा क्लोजर देता है.

फाइनल वर्डिक्ट

'पहला प्यार दूसरी बार' ऐसी फिल्म है, जिसे दोस्तों के साथ देखकर आप अपने पुराने क्रश और स्कूल के दिनों की यादें ताजा कर सकते हैं. इसमें कुछ अच्छे ह्यूमरस पल हैं, कलाकारों की ताजगी है और संगीत भी दिल को छूता है. हां, कहानी में कुछ कमियां हैं और रोमांस को थोड़ा और दमदार बनाया जा सकता था.

फिर भी, अगर आप बिना ज्यादा दिमाग लगाए एक हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी.