Pati Patni Aur Woh Do वैसी फिल्म बिल्कुल नहीं है जैसी इसका नाम सुनकर या ट्रेलर देखकर लगता है. अगर आपको लगा था, कि फिल्म पति, पत्नी और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर वाली कहानी होगी, तो यहां फिल्म एक अलग रास्ता पकड़ लेती है. बिना स्पॉइलर दिए इतना जरूर कहा जा सकता है कि फिल्म का असली मजा इसके कंफ्यूजन और अन-एक्सपेक्टेड सिचुएशन में है.
यह पूरी तरह एक हल्की-फुल्की, फैमिली एंटरटेनर फिल्म है. यहां कॉमेडी पंचलाइन्स से कम और सिचुएशन्स से ज्यादा निकलती है. फिल्म बार-बार जोक्स सुनाने की कोशिश नहीं करती, बल्कि कैरेक्टर्स के बीच होने वाली गलतफहमियों और कन्फ्यूजन से हास्य पैदा होता है. यही वजह है कि कई दृश्य स्वाभाविक रूप से मजेदार लगते हैं.
Ayushmann Khurrana एक बार फिर साबित करते हैं कि क्विर्की और एनटरटेनिंग स्क्रिप्ट चुनने में उनका जवाब नहीं है. यह वही टिपिकल 'Ayushmann Khurrana वाली फिल्म है' जिसमें अपना सा लगने वाला उथल-पुथल, अजीब स्थितियां और एफर्टनेस कॉमेडी देखने को मिलती है. उनका कॉमिक टाइमिंग पूरी फिल्म को संभालकर रखता है.
Sara Ali Khan यहां काफी कॉन्फिडेंट नजर आती हैं और कॉमिक सेंस में अच्छी पकड़ बनाती हैं. Wamiqa Gabbi अपनी सिम्पलीसिटी और वार्मथ फिल्म में चार्म जोड़ती हैं. रकुल प्रीत के पास स्क्रीनटाइम कम था लेकिन फिर भी उन्होने अपनी पिछली फिल्मों से बेहतर काम किया है.
Vijay Raaz और Tigmanshu Dhulia अपने सीन्स में अलग ही मजा लेकर आते हैं.
फिल्म की कहानी प्रजापति पांडे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक वन अधिकारी हैं, जबकि उनकी बीवी वामिका गब्बी पत्रकार बनी हैं. इसके बाद शुरू होता है कन्फ्यूजन और कॉमिक सिचुएशन्स का सिलसिला.
Mudassar Aziz ने फिल्म को एंटरटेनिंग बनाए रखा है. 117 मिनट की फिल्म कहीं भी बहुत ज्यादा खिंची हुई महसूस नहीं होती. साथ ही बैकग्राउंड में पुराने गानों का इस्तेमाल नॉस्टैल्जिया वाला फील देता है.
हालांकि, फिल्म की कमी यह है कि इसमें कोई बहुत फ्रेश कॉमेडी या यूनिक एंगल देखने को नहीं मिलता. कई जगह स्क्रीन प्ले और बेहतर हो सकता था और कुछ सीन्स फैमिलियर लगते हैं. लेकिन इन कमियों के बावजूद फिल्म एंटरटेनिंग बनी रहती है.
यह कोई पाथब्रेकिंग कॉमेडी नहीं है, लेकिन फैमिली के साथ थिएटर में एंजॉय की जा सकने वाली क्लीन एंटरटेनर जरूर है.