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SUZHAL: THE VORTEX REVIEW : ये तमिल वेब सीरीज़, हिंदी के सुपरहिट कंटेंट पर भारी है

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रीजनल ही अब नेशनल है, अगर ये बात मानने में आपको ज़रा सा भी गुरेज़ है, तो अमेज़न प्राइम की नई नवेली सीरीज़ SUZHAL: THE VORTEX आपके लिए ही है। 30 भाषा और 240 देशों में स्ट्रीम हो रही SUZHAL की ओरिजिनली तमिल में है, तमिलनाडू के एक छोटे से हिल स्टेशन संबलूर से शुरु होती है, जहां मान्या कोल्लई त्यौहार शुरु ही हो रहा है, नौ दिनों तक ये त्यौहार चलना है, जिसमें पूरा गांव शामिल हो रहा है। त्यौहार के दौरान रंगे हुए चेहरे, देवी का रूप धरे किरदार, मेले में होने वाले नाटक सब कुछ SUZHAL की कहानी का हिस्सा बनते हैं।


मान्या कोल्लई के शुरुआत के ही दिन, संबलूर में दो हादसे होते हैं। पहला शहर की सबसे बड़ी सीमेंट फैक्ट्री में देर रात आग लग जाती है, वो भी तब जब फैक्ट्री में स्ट्राइक हुई है। इस हादसे में पूरी फैक्ट्री जलकर राख हो जाती है, लेकिन कोई जान नहीं जाती। उसी रात फैक्ट्री के मजदूर यूनियन लीडर शनमुगन की 15 साल की बेटी नीला गायब हो जाती है। नीला को सनमुगन ने उसके खराब मार्क्स की वजह से डांट लगाई थी, तो पहले तो ये लगता है कि नीला घर छोड़कर चली गई है।

 

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फिर शुरु होती है, इन दोनो हादसों की इन्वेस्टीगेशन। इंस्पेक्टर रेजिना और सब इंस्पेक्टर सक्करई इस इन्वेस्टीगेशन में जितना अंदर जाते हैं, कहानी उलझती जाती है। पहले लगता है कि इंस्पेक्टर रेजिना के बेटे अधिस्यम ने नीला को किडनैप किया, लगता है कि केस सुलझ ही रहा है कि एक नया ट्विस्ट सामने आ जाता है।
SUZHAL हर मोड़ पर एक नई कहानी पेश करती है। नीला की बहन नंदिनी के गांव आने के बाद से इस कहानी करवट लेनी शुरु करती है। दिलचस्प पहलू ये है कि इस कहानी को वहां हो रहे मान्या कोल्लई त्यौहार के साथ ऐसा गुंथा गया है, कि आप पूरी तरह से उसमें खोते चले जाते हैं।

माता को बलि की कहानी से लेकर, फैक्ट्री के मालिक के उपर लगे सेक्सुअल एब्यूज़ के इल्ज़ाम तक, आप को जब भी लगता है कि इस केस से परदा उठने ही वाला है, ये और गहरा जाता है और हर बार एक नया सबक सिखा जाता है।
SUZHAL: THE VORTEX अपने आपको सिर्फ़ इन्वेस्टेगिव थ्रिलर वाली वेब सीरीज़ तक समेट कर नहीं रखती, बल्कि अपने दायरे को आगे बढ़ाकर चाइल्ड एब्यूज़ जैसे बोल्ड टॉपिक तक लेकर जाती है। और इससे जुड़े तमाम टैबू को बहुत संजीदगी से समझाती है। आपको समझ आता है कि जब कोई बच्चा, ऐसे हालात से गुज़रता है तो वो किन मानसिक हालात से गुज़रता है।

SUZHAL के पहले चार एपिसोड ब्रम्मा ने डायरेक्ट किए हैं और अगले चार एपिसोड अनुचरन ने, और दोनो ही डायरेक्टर्स ने इस सीरीज़ को ज़रा सा भी फिसलने नहीं दिया है, आपको अंदाज़ा ही नहीं होता कि ये दो डायरेक्टर्स का काम है।

 

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विक्रम-वेधा की मशहूर राइटर डायरेक्टर जोड़ी गायत्री-पुष्कर ने इस कहानी को गढ़ा और पेश किया है, और इसमें दो राय नहीं कि ये SUZHAL का स्क्रीनप्ले इसका स्टार है। साथ ही सिनेमैटोग्राफर मुकेश और सैम का बैकग्राउंड स्कोर SUZHAL को और इंटेस बनाता है।

परफॉरमेंस पर आइएगा, तो इस सीरीज़ का हर एक एक्टर विनर है। शनमुगन के किरदार में पार्थिबन ने अपने मुश्किल किरदार को ऐसे निभाया है, जैसे कि वो बिल्कुल रियलिस्टिक हो। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर रेजिना बनी श्रिया रेड्डी को देखना अपने आप में एक एक्सपीरियंस है। SUZHAL की सबसे ख़ास बात ये है कि यहां कोई किरदार सिर्फ़ काला या सफेद नहीं, बल्कि वो ग्रे है, और ये छोटे से छोटे, बड़े-बड़े से बड़े किरदार सब पर लागू होता है। नंदिनी बनी ऐश्वर्या राजेश के आंख़ों की बेचैनी आप महसूस कर सकते हैं और आख़िरी दो एपिसोड में तो बिल्कुल छा जाती हैं। सब इंस्पेक्टर सक्करई बने कथिर, इस शो के स्टार हैं। बेहतरीन कलाकारों के साथ, शानदार कहानी है SUZHAL: THE VORTEX, अपनी-अपनी भाषा में इसके पहले एपिसोड को देखने के बाद, इसे आप पूरा किए बिना छोड़ेंगे नहीं, ये गारंटी है।

SUZHAL: THE VORTEX को 4 स्टार

 

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