Mrs Movie Review: बॉलीवुड एक्ट्रेस सान्या मल्होत्रा की 'मिसेज' ओटीटी पर रिलीज होने के लिए तैयार है। मूवी का ट्रेलर ही ऑडियंस के दिल को भा गया था। वहीं फैंस का इंतजार खत्म होने जा रहा है। 7 फरवरी को मूवी जी-5 पर रिलीज होने के लिए तैयार है। इस फिल्म ने घरेलू महिलाओं की अनकही तकलीफों को बखूबी दिखाया है। वहीं मूवी ये भी बताती है कि घर के काम को एक महिला की ड्यूटी समझना कितना गलत है। वहीं मूवी का पहला रिव्यू भी सामने आ गया है। आइए आपको भी बताते हैं आखिर सान्या की ये मूवी कैसी है?
'मिसेज' की कहानी
'मिसेज' की कहानी एक हाउसवाइफ ऋचा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने घर और रिश्तों को संभालने की कोशिश में खुद को कहीं खो चुकी हैं। उसका पति दिवाकर (निशांत दहिया) एक मेल गायनोकॉलोजिस्ट है, जो पेशे से तो महिलाओं के शरीर की परेशानियों को समझता है, लेकिन अपनी पत्नी की भावनाओं को देखने में असमर्थ है। घर में ससुर (कंवलजीत सिंह) की सोच भी वही पुरानी है जहां महिला को घर संभालना, खाना बनाना, सफाई करना और पति की जरूरतों को पूरा करना ही अपनी प्राथमिकता बनानी होती है।
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फिल्म 'मिसेज' मलयालम ब्लॉकबस्टर 'द ग्रेट इंडियन किचन' का हिंदी रीमेक है। हालांकि इसमें कुछ बदलाव किए गए हैं। इसमें परिवार को थोड़ा मॉर्डन दिखाया गया है, लेकिन सोच अब भी वही पारंपरिक बनी हुई है।
किरदार और एक्टिंग
सान्या मल्होत्रा ने ऋचा के किरदार को बड़े शानदार तरीके से निभाया है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, एक्सप्रेशंस और डांसिंग टैलेंट इस किरदार में जान डालते हैं। निशांत दहिया भी अपने किरदार को सटीक ढंग से निभाते हैं, लेकिन असली प्रभाव छोड़ते हैं कंवलजीत सिंह, जो मॉडर्न दिखने के बावजूद अपने पुराने विचारों को छोड़ नहीं पाते।
सिनेमैटोग्राफी
फिल्म में किचन का सेट-अप बहुत ही वास्तविक लगता है। मॉर्डन किचन होने के बावजूद वहां की समस्याएं वैसी ही बनी हुई हैं। सड़ चुकी पाइपों से टपकता पानी, बिखरे बर्तन और घर का अनगिनत काम- ये सब मिलकर एक महिला की डेली लाइफ को दर्शाती है।
इमोशनल टच
फिल्म आपको हर उस महिला की कहानी सुनाती है, जो बिना किसी शिकायत के घर के कामों में लगी रहती है, लेकिन उसकी खुद की इच्छाएं और सपने पीछे छूट जाते हैं। जब ऋचा बार-बार अपने डांस क्लास को छोड़कर किचन में लौटती है, तो वो न सिर्फ अपने सपनों से दूर जाती है, बल्कि अपने अस्तित्व को भी खोने लगती है।
मूवी का क्लाइमैक्स
फिल्म का क्लाइमैक्स बेहद प्रभावशाली है। जब ऋचा पहली बार जलता हुआ फुल्का बनाती है और अगली बार इसे ठीक करने की कोशिश करती है, तो यह सिर्फ एक रोटी नहीं होती, बल्कि एक महिला के संघर्ष की पूरी कहानी बयान कर देती है।
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