थलपति विजय ने बीते दिनों अपने संन्यास का ऐलान किया था और उन्होंने बताया था कि वह अब राजनीति पर ध्यान देंगे. संन्यास की अनाउंसमेंट के बाद उनकी आखिरी फिल्म जन नायकन सिनेमाघरों में 9 जनवरी 2026 को रिलीज होने वाली थी. हालांकि रिलीज से पहले इस मूवी को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया और इसकी सिनेमा रिलीज टाल दी गई. हालांकि मेकर्स ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जहां से उन्हें निराशा हाथ लगी है.
सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के निर्माता की सेंसर बोर्ड से मंजूरी की याचिका की सुनवाई से भी इनकार कर दिया है. कोर्ट ने निर्माताओं को राहत के लिए मद्रास हाई कोर्ट की खंडपीठ से संपर्क करने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट को 20 जनवरी तक याचिका पर फैसला सुनाने का आदेश दिया है. बता दें कि केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी ने पिछले शुक्रवार को हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी.
फिल्म के सर्टिफिकेट न मिलने पर मेकर्स ने दर्ज की थी याचिका
दरअसल, 9 जनवरी को मद्रास हाई कोर्ट ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन(CBFC) को जन नायकन को तत्काल सेंसर सर्टिफिकेट देने का निर्देश देने वाले सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी, जिससे थलपति की फिल्म रिलीज से पहले बीच में लटक गई है.
जन नायकन के सर्टिफिकेशन पर लगी रोक
बता दें कि थलपति विजय की यह आखिरी फिल्म है. उन्होंने बीते साल अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान किया था. उन्होंने पार्टी तमिलागा वेट्री कजगम लॉन्च की थी. जन नायकन की रिलीज के बाद एक्टर अपने राजनीतिक करियर पर ध्यान केंद्रित करने वाले हैं. हालांकि फिल्म की रिलीज पर अभी भी खतरा मंडरा रहा है. जहां यह 9 जनवरी को रिलीज होने वाला थी, लेकिन एकल बेंच के आदेश के बाद डिवीजन बेंच ने फिल्म के सर्टिफिकेशन पर रोक लगा दी है. मुख्य न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव और जी अरुल मुरुगन की पहली पीठ ने सीबीएफसी द्वारा दायर अपील पर एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ अंतरिम रोक लगा दी.
यह भी पढ़ें- शिवकार्तिकेयन की फिल्म ‘पराशक्ति’ पर गहरा हुआ विवाद! कैंसिल हुए 600 शोज, जानें वजह