Tera Yaar Hoon Main Review: अगर आपको मिथुन चक्रवर्ती का वह मशहूर सीन याद है जिसमें वह साइकिल के पीछे से गोली चलाते हैं, तो 'तेरा यार हूं मैं' में एक ऐसा दृश्य भी है जिसमें हीरो गुंडों से लड़ते-लड़ते साइकिल को दो हिस्सों में तोड़ देता है. यही दृश्य काफी हद तक पूरी फिल्म का स्तर भी बयां कर देता है.

फिल्म के ट्रेलर रिलीज होने के बाद निर्माता-निर्देशक इंद्र कुमार के बेटे और फिल्म के हीरो अमन इंद्र कुमार को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया गया था. किसी की शक्ल या निजी पहचान के आधार पर ट्रोलिंग गलत है, लेकिन अगर अभिनय में इमोशन्स ही नजर न आएं तो दर्शकों की निराशा स्वाभाविक है.

अमन इंद्र कुमार और आकांक्षा शर्मा की परफॉर्मेंस पूरी फिल्म में लगभग एक जैसी लगती है. कई दृश्यों में भावनात्मक गहराई की कमी साफ दिखाई देती है, वहीं परेश रावल जैसे अनुभवी कलाकार को भी कहानी सही ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाती। उनका किरदार होने के बावजूद असर नहीं छोड़ पाता.

फिल्म की कहानी और प्रस्तुति कई जगह 80 और 90 के दशक की फिल्मों की याद दिलाती है. हीरो-हीरोइन की पहली मुलाकात दिल वाले दुल्हनिया ले जाऐगें की कॉपी है और फिल्म के सेकेन्ड हाफ की कहानी में बोझिल और पुरानी है. मिलाप मिलन जावेरी के डायलॉग्स और डायरेक्शन दोनों ही इतने खराब हैं कि फिल्म का एक भी सीन इंटरेस्ट डेवलप नहीं हो पाता. लिहाज़ा लगभग हर जगह कहानी, स्क्रीनप्ले और एक्टिंग तीनों मिलकर भी कुछ नहीं कर पाते.

ट्रेलर के बाद से कोई खास उम्मीदें नहीं थीं और बची कुची उम्मीदें फिल्म के 10 मिनिट में खत्म हो जाती हैं.

अगर आप अच्छी कहानी, शानदार एक्टिंग और नए स्टोरीटेलिंग की उम्मीद कर रहे हैं, तो तेरा यार हूं मैं आपको निराश करेगी. यह उन फिल्मों में शामिल हो सकती है जिन पर भविष्य में मीम्स ज्यादा बनें, लेकिन फिल्म कम याद रखी जाए

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