Peddi Box Office Collection Day 8: बॉक्स ऑफिस पर साउथ के मेगास्टार राम चरण का जलवा दूसरे हफ्ते भी सिर चढ़कर बोल रहा है. 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म ने अपने पहले आठ दिनों में ही कमाई के ऐसे आंकड़े छू लिए हैं, जिसे देख बॉलीवुड के बड़े-बड़े मेकर्स के पसीने छूट गए हैं. जहां इसके साथ रिलीज हुई अन्य बॉलीवुड फिल्में बॉक्स ऑफिस पर पानी मांग रही हैं, वहीं यह फिल्म अब भारत में ₹200 करोड़ के महाक्लब में शामिल होने के बेहद करीब पहुंच चुकी है. आखिर आठवें दिन इस फिल्म ने कितनी तगड़ी कमाई की है और क्या है इसकी दिलचस्प कहानी?
आठवें दिन भी बॉक्स ऑफिस पर रहा 'पेद्दी' का दबदबा
राम चरण स्टारर फिल्म 'पेद्दी' ने अपने दूसरे गुरुवार यानी रिलीज के आठवें दिन भारत में ₹7.42 करोड़ का शानदार नेट कलेक्शन किया है. वर्किंग डे होने के बावजूद फिल्म की कमाई में गिरावट न होना यह साबित करता है कि दर्शकों के बीच इस फिल्म को लेकर जबरदस्त क्रेज बना हुआ है और आने वाले वीकेंड पर इसकी कमाई में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है.
₹200 करोड़ के क्लब में एंट्री मारने के बेहद करीब पहुंची फिल्म
आठ दिनों की धमाकेदार परफॉर्मेंस के बाद 'पेद्दी' ने भारत में कुल ₹193.55 करोड़ का नेट कलेक्शन दर्ज कर लिया है. फिल्म की मौजूदा रफ़्तार को देखते हुए यह साफ है कि यह आज (अपने नौवें दिन) ही घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ₹200 करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लेगी. इस बंपर कमाई ने फिल्म को साल 2026 की सबसे सफल फिल्मों की लिस्ट में शामिल कर दिया है.
वरुण धवन की 'है जवानी…' और बॉबी देओल की 'बंदर' को पछाड़ा
सिनेमाघरों में इस समय 'पेद्दी' का मुकाबला दो बॉलीवुड फिल्मों से चल रहा है, जिनमें वरुण धवन की 'है जवानी तो इश्क होना है' और बॉबी देओल स्टारर 'बंदर' शामिल हैं. हालांकि राम चरण के इस तूफान के आगे ये दोनों ही फिल्में पूरी तरह फीकी साबित हुई हैं. कमाई के मामले में 'पेद्दी' इन दोनों फिल्मों के मुकाबले कई गुना आगे चल रही है और बॉक्स ऑफिस की इकलौती विजेता बनी हुई है.
जातिवाद के खिलाफ लड़ाई और खेल का जुनून
अगर फिल्म की कहानी की बात करें, तो यह एक गांव के गरीब मजदूर 'पेद्दी' (राम चरण) की जिंदगी पर आधारित है. पेद्दी अपनी और अपने गांव की खोई हुई पहचान वापस पाने के लिए ऊंची जाति के रसूखदार लोगों से लोहा लेता है. वह क्रिकेट का एक बेहतरीन खिलाड़ी है और अपने खेल के दम पर पैसे कमाता है, लेकिन बाद में अपने अधिकारों और आत्मसम्मान की जंग जीतने के लिए वह क्रिकेट छोड़ देता है और एक पहलवान बनकर समाज की रूढ़ियों से लड़ता है