Housefull 5 Review (Navin Singh Bhardwaj): कॉमेडी फिल्में शुरू से ही ऑडियंस को पसंद आती रही हैं। आज भी इंडियन मूवीज कितना भी सीरियस जॉनर का क्यों ना हो जाए, मेकर्स फिल्म में कहीं ना कहीं थोड़ा सा कॉमेडी का तड़का मार ही देते हैं। मेकर्स को भी पता होता है कि कॉमेडी का ये तड़का व्यूअर्स को अपनी सीट से बांधे रखेगा। तभी तो ऑडियंस की नब्ज को पकड़ते हुए आज कल भारतीय सिनेमा में हॉरर कॉमेडी से लेकर कॉमेडी थ्रिलर फिल्में बनने लगी हैं। ऐसे ही कॉमेडी थ्रिलर फिल्म लेकर आ रहे हैं डायरेक्टर तरुण मनसुखानी, जिसमे एक नहीं दो नहीं बल्कि 18 फिल्मी सितारे कॉमेडी करते नजर आएंगे। जी हां हम बात कर रहे हैं साजिद नाडियाडवाला की लांग फ्रेंचाइजी फिल्म हाउसफुल 5 की, आखिर कैसी है अक्षय कुमार, अभिषेक बच्चन स्टारर फिल्म हाउसफुल 5, उसके लिए पढ़िए E24 का रिव्यू।
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फिल्म की कहानी
कहानी की शुरुआत एक क्रूज से होती है जहां जूलियस उर्फ जॉली (अक्षय कुमार), जलालुद्दीन उर्फ जॉली (रितेश देशमुख ) और जलभूषण उर्फ जॉली (अभिषेक बच्चन) अपनी-अपनी बीवियों कांची (नरगिस फाखरी), जारा ( सोनम बाजवा ) और शशिकला (जैकलिन फर्नांडीस) के साथ क्रूज पर अपने मृत पिता रणजीत के वसीयत के हिसाब से उसकी सारी जागीर हथियाने आते हैं। वैसे आपको बता दें रणजीत मरने से पहले अपनी वसीयत में ये लिखकर जाता है कि उसके मरने के बाद उसकी सारी प्रॉपर्टी का असली हकदार जॉली होगा।
अब चूंकि 3 जॉली हैं इसलिए रणजीत का एक और बेटा और जॉली का सौतेला भाई देव (फरदीन खान) असली जॉली कौन है इसका पता करना चाहता है। इन तीनों के डीएनए टेस्ट से पहले ही क्रूज के डॉक्टर की हत्या हो जाती है, इसका इल्जाम तीनों जॉली के ऊपर लग जाता है। अब क्रूज पर तीनों जॉली के सौतेले भाई देव पर ये मर्डर मिस्ट्री और रणजीत के प्रॉपर्टी के असल हकदार कौन हैं दोनों की गुत्थी सुलझाने की जिम्मेदारी आ जाती है। आखिर असली जॉली कौन है और आखिर डॉक्टर की हत्या कौन करता है, ये मिस्ट्री सुलझाने के लिए आपको अपने नजदीकी सिनेमाघरों का रुख करना होगा।
डायरेक्शन और राइटिंग
'दोस्ताना' और 'ड्राइव' के बाद 'हाउसफुल 5' के डायरेक्शन की जिम्मेदारी तरुण मनसुखानी ने उठाई है। पिछले 4 पार्ट्स को डायरेक्ट करने वाले निर्देशक साजिद खान इस फिल्म को एक बार फिर डायरेक्ट करने वाला थे पर उस दौरान पर्सनल लाइफ में हो रहे उतार चढ़ाव और इल्जामात की वजह से साजिद खान ने फिल्म के डायरेक्टर के पोस्ट को अलविदा कह दिया। फिर निर्देशक तरुण मनसुखानी ऑनबोर्ड आए।
अब बात करते हैं डायरेक्शन की पिछले 4 सीजन को ध्यान में रखते हुए ये कहा जा सकता है कि तरुण ने बहुत अच्छा काम किया है। एक साथ 18-19 फिल्मी सितारों को ऑन स्क्रीन डायरेक्ट करने की जिम्मेदारी को अच्छे से निभाया है। इस फिल्म के लेखन की जिम्मेदारी भी फरहाद सामजी के साथ तरुण मनसुखानी ने उठाई है। फरहाद सामजी के डायलॉग्स फिल्म में बेहद हंसाते हैं। वहीं फिल्म के कुछ सीन में ओवर एक्सेसिव कॉमेडी की वजह से वो सीन थोड़ा लॉजिक लेस और बोरिंग भी नजर आया है। फिल्म का 1st हाफ जहां मिस्ट्री क्रिएट करने में बरकरार रखता है, वहीं 2nd हाफ फिल्म देखने का इंटरेस्ट भी बरकरार रखता है। हां क्लाइमेक्स की अगर बात की जाए तो मेकर्स ने फिल्म के 2 क्लाइमेक्स रखे हैं जो भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का बेहद यूनिक स्टेप है। फिल्म के सीन्स के हिसाब से फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है जिसका क्रेडिट जूलियस पैकियम को जाता है।
एक्टिंग
ये बहुत ही रेयर होता है कि किसी फिल्म में इतने सारे स्टार्स होते हैं। और ये भी बहुत रेयर है कि कोई फिल्म अपने 5वें अध्याय तक पहुंचती है। फिल्में में सारे एक्टर्स ने सीन्स के हिसाब से अच्छा काम किया है। हां कहीं-कहीं अक्षय कुमार की एक्टिंग ओवर एक्टिंग लगी पर इग्नोर किया जा सकता है। संजय दत्त और जैकी श्रॉफ की एंट्री और कॉमिक टाइमिंग भी कमाल की है।
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