Angh Movie: भारतीय सिनेमा आज तेजी से बढ़ रहा है. पिछले एक दशक में बॉलीवुड के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों ने इतिहास रचा है. दुनियाभर में भारतीय फिल्मों को खूब प्यार मिल रहा है. भारत की ही अलग-अलग फिल्मों ने ग्रैमी से लेकर ऑस्कर्स तक अपनी अलग पहचान बनाई और भारत का नाम दुनियाभर में रोशन किया. हाल ही में मराठी फिल्म 'गोंधल' को ऑस्कर्स में भेजा गया. वहीं अब इस लिस्ट एक और फिल्म का नाम जुड़ गया है. नागालैंड कि पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म आंग को प्रतिष्ठित टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के 51वें संस्करण में सम्मानित किया गया है.
फिल्म 'आंग' को ऑस्कर्स में डायरेक्ट एंट्री
फिल्म आंग को नागालैंड के डायरेक्टर तेजा रियो ने डायरेक्ट किया है. इस फिल्म को टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्लेटफॉर्म अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. इसी के साथ इस फिल्म को भारत की ओर से ऑस्कर्स की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म की कैटेगरी में डायरेक्ट एंट्री मिल गई है.
फिल्म को लेकर डायरेक्टर ने क्या कहा?
फिल्म की इस सफलता पर बात करते हुए डायरेक्टर तेजा रियो ने कहा- 'प्लेटफॉर्म कॉम्पिटिशन अवॉर्ड को जीतना मेरे लिए एक बड़ा सम्मान है और मैं अभी भी इसे हजम नहीं कर पा रहा हूं. नॉर्थ ईस्टस इंडिया के इंडिजिनियस रीजन नागालैंड से जिसे ट्राइबल लैंग्वेज में बनाया गया है, उसे टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में अवॉर्ड मिलना अपने आप में एक बड़ी बात है. ये सिर्फ मेरे लिए ही नहीं बल्कि उन सभी लोगों के लिए सम्मान की बात है जिन्होंने इस फिल्म को आस्तित्व में लाया. विश्वस्तर पर हमारी कॉम्युनिटी और उसकी कहानियों को सराहा जा रहा है ये देखकर सुकून मिल रहा है.'
फिल्म 'आंग' की कहानी
बात करें फिल्म की तो 'आंग' (Angh) मूल रूप से नागालैंड के कोन्याक भाषा की ड्रामा फिल्म है. ये 2021 में इसी नाम से बनी तेजा रियो की शॉर्ट फिल्म पर आधारित है. इसकी कहानी 1960 के दशक की है. इसमें अंग्बा नाम का एक बुजुर्ग कोन्याक सरदार हैं, जो एक ऐसे गांव के आखिरी निवासी हैं जिसे बाकी लोग छोड़ चुके हैं. कहानी में आगे एक अमेरिकी बैपटिस्ट मिशनरी अंग्बा के पारंपरिक जीवनशैली की परीक्षा लेता है. अंग्बा और उसका परिवार अपने वीरान पुश्तैनी गांव में ही रहते हैं. वो अपनी लुप्त होती आदिवासी परंपराओं और यादों को संजोए रखते हैं. वहीं ये मिशनरी वहां आधुनिक मदद, दवाइयां और ईसाई धर्म साथ लाता है. सरदार का गूंगा बेटा, अमाओ इस नए धर्म और इसकी जीवनशैली की ओर आकर्षित होने लगता है, जिससे सांस्कृतिक और समय के साथ होने वाले दूसरे बदलाव का दौर शुरू हो जाता है. ऐसे में गांव में आध्यात्मिक टकराव की स्थिति पैदा होती है.