बॉलीवुड की दुनिया में कई कलाकार आए, लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं, जो वक्त से भी आगे निकल जाते हैं. ऐसी ही एक शख्सियत थीं ये हसीना, जिन्हें लोग आज भी उनकी ज़िंदादिली और शानदार अभिनय के लिए याद करते हैं. 102 साल की लंबी उम्र जीने वाली इस अदाकारा की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. उनका बॉलीवुड से खास कनेक्शन और है, वो 1912 में जन्मी थीं, और हिंदी सिनेमा की शुरुआत 1013 से मानी जाती है, तो इस लिहाज से ये अदाकारा बॉलीवुड से भी पुरानी हैं.
कौन हैं ये अदाकारा?
हम जिस बाला की बात कर रहे हैं, वो जोहरा सहगल हैं, इनका जन्म 27 अप्रैल 1912 को यूपी के सहारनपुर में एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार में हुआ था, और उनका असली नाम साहिबजादी जोहरा मुमताज़ुल्लाह खान बेगम था. उन्होंने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे. बचपन में ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था. आगे चलकर उनके पति कामेश्वर सहगल का भी असमय निधन हो गया. इन मुश्किलों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. विदेशों में काम पाने के लिए भी उन्होंने खूब स्ट्रगल किया. इतना ही नहीं, वो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी लड़ीं और उसे मात देकर एक बार फिर सक्रिय जीवन जीने लगीं.
एक्ट्रेस ने जो चाहा, वो किया
उनकी बेटी किरण सहगल अपनी मां को याद करते हुए बताती हैं, कि जोहरा बेहद खुशमिजाज थीं. वो हंसी मजाक करती थीं, लेकिन हालात के हिसाब से गंभीर भी हो जाती थीं. उम्र बढ़ने के साथ उन्हें शारीरिक तकलीफें जरूर थीं, लेकिन उन्होंने कभी खुद को डिप्रेशन का शिकार नहीं बनने दिया. उनकी जिंदादिली आखिरी वक्त तक बनी रही. ज़ोहरा सहगल का जीवन अनुशासन से भरा हुआ था. वो रोजाना एक घंटे धूप में बैठती थीं, चाहे मौसम कैसा भी हो. उनका मानना था, कि जिंदगी को खुलकर जीना चाहिए. वो अकसर कहा करती थीं, 'मैंने जिंदगी में जो करना था, कर लिया. मुझे किसी बात का मलाल नहीं है.'
इन फिल्मों से मचाई धूम
फिल्मों की बात करें, तो नई पीढ़ी उन्हें Cheeni Kum और Dil Se जैसी फिल्मों में उनके शानदार अभिनय के लिए याद करती है. छोटे-छोटे किरदारों में भी वो अपनी अलग छाप छोड़ जाती थीं. जोहरा सहगल का पाकिस्तान से भी गहरा नाता रहा है. देश के बंटवारे से पहले वो लाहौर में अपने पति के साथ डांस इंस्टीट्यूट चलाती थीं, लेकिन 1947 के विभाजन के दौरान भड़की हिंसा के कारण उन्हें भारत आना पड़ा. उस मुश्किल दौर में उनका परिवार पाकिस्तान में ही रह गया, जबकि उन्होंने भारत में अपनी नई जिंदगी शुरू की.
यादों में जिंदा हैं जोहरा
आज भी उनकी यादें जिंदा हैं. हर साल अप्रैल में उनकी बेटी उनके नाम पर 'जोहरा सहगल फेस्टिवल ऑफ आर्ट' का आयोजन करती हैं, जहां उनकी कला और योगदान को याद किया जाता है. ज़ोहरा सहगल सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि वो एक ऐसी प्रेरणा थीं, जिन्होंने ये साबित किया, कि उम्र कभी भी आपके जज्बे को सीमित नहीं कर सकती.