The Diplomat Review/ Navin Singh Bhardwaj: पैंडेमिक के बाद जहां OTT स्पेस का काफ़ी बोलबाला रहा वहीं बॉलीवुड के कई ऐसे भी सितारे हैं जिन्होंने अपने स्क्रीन प्रजेंस के साथ साथ अपने प्रोडक्शन हाउस पर भी फोकस किया। साल 2022 में अपनी फ़िल्म अटैक पार्ट-1 के हद से ज्यादा बुरे कलेक्शन के बाद जॉन को शाहरुख खान की पठान से संजीवनी मिली। मगर वेदा ने जॉन को फिर एक झटका दिया। पिछली बार वेदा की प्रमोशन्स के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस पर हुए पंगे के बाद, इस बार जॉन ने - द डिप्लोमैट की प्रमोशन भी संभल-संभल कर की। आखिर कैसी है - दि डिप्लोमैट, उसके लिए पढ़िए E24 का रिव्यू...
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कहानी (The Diplomat Review)
द डिप्लोमैट की कहानी सच्ची घटनाओं पर बेस्ड है और ऑलरेडी पब्लिक डोमेन पर है। इस कहानी की शुरुआत पाकिस्तान के भारतीय दूतावास से होती है जहां उज्मा अहमद (सादिया खतीब) एम्बेसी में घुस जाती है। उज़्मा सबको बताती है कि वो इंडियन है और उसे भारत वापस जाना है। उज्मा की पाकिस्तान में जबरदस्ती शादी की जाती है, जिसके बाद उसका पति उसके साथ बुरा बर्ताव करता है। वो अपने पति से हार चुकी है और भारतीय दूतावास के डिप्टी हाई कमीशन जे.पी सिंह यानी जॉन अब्राहम से मदद की गुहार लगाती है। उज्मा का बैकग्राउंड चेक करने के बाद उसे भारत वापस भेजने की कोशिश शुरू हो जाती है, उज्मा के भारत वापसी की खबर से पाकिस्तान के डिप्लोमैट्स पूरी कोशिश करते हैं की उसे ना भेजा जाये। अब इसके आगे की कहानी क्या मोड़ लेती है उसके लिए आपको अपने नजदीकी थियेटर का रुख करना होगा।
डायरेक्शन और राइटिंग
शिवम नायर ने इस फिल्म को डायरेक्ट किया है और इसके राइटर रितेश शाह हैं। डायरेक्शन के मामले में शिवम नायर ने ठीक ठाक काम किया है और रितेश ने जमकर वुमन कार्ड खेलने की पूरी कोशिश की है। महिला उत्पीड़न को रितेश ने पूरी फ़िल्म तरजीह दी है, जो इस कहानी की इंपैक्टफुल बनाती है। चाहे वो महिला पर अत्याचार हो, या काबुल में हुए बम ब्लास्ट में बच्ची की मौत...रियलिज़्म के साथ सिनेमैटिक लिबर्टी का कहानी में और प्रेजेंटेशन में पूरा यूज किया गया है। वैसे तो 'द डिप्लोमैट' की कहानी तेजी से आगे बढ़ती है, मगर इसमें कई सीक्वेंस - स्पीड ब्रेकर का काम करते हैं, जिन्हे देखकर आप भी सवाल करेंगे कि आखिर ये क्यों दिखाया गया? ये करने का मतलब क्या था?
कैसी है एक्टिंग
जॉन अब्राहम, सादिया ख़तीब के अलावा रेवती, कुमुद मिश्रा और शारिब हाशमी इस फिल्म में लीड रोल में नजर आए हैं। पहले बात करते हैं उज्मा का किरदार निभाने वाली सादिया की। एक अगवा हो चुकी महिला और भारत में रह रही बेटी को मिस करती मां का किरदार निभाने वाली सादिया बड़े पर्दे पर वो इमोशन को पर्दे पर अच्छे से नहीं उतार पाईं। पति का अत्याचार झेल चुकी उज्मा का दर्द दिखाने में वो उनके एक्सप्रेशन्स कम-ज्यादा होते रहे।
जॉन की एक्टिंग ठीक-ठाक
वहीं एक्टर जॉन अब्राहम ने डिप्लोमैट जे पी सिंह के किरदार को ठीक-ठाक निभाया है, रेवती ने दिवंगत मिनिस्टर सुषमा स्वराज का रोल प्ले किया है और सिर्फ उन्होंने किरदार के साथ ईमानदारी दिखायी है। इंटरवल के बाद मूवी में कुमुद मिश्रा के किरदार की एंट्री दिखाई गई है और वो आते ही स्क्रीन पर अपना जादू चला देते हैं। इन सबके अलावा शारीब हाशमी ने भी शानदार काम किया है, विशाल वशिष्ठ और विधात्री बंदी का भी अच्छा है।
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