Actress Live-in Relationship: हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार और दिवंगत एक्टर राजेश खन्ना एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. दरअसल, हाल ही में एक्ट्रेस अनीता आडवाणी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सामने आया है, जो एक्ट्रेस के हक में नहीं आया. अनीता आडवाणी ने राजेश खन्ना के साथ रिश्ते को शादी मानने की याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले को लग्जरी लिटिगेशन कहते हुए अनीता आडवाणी की अर्जी को खारिज कर दिया. चलिए आपको ये पूरा मामला विस्तार से समझाते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक्ट्रेस अनीता आडवाणी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दिवंगत सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ अपने रिश्ते को शादी के तौर पर मान्यता देने की मांग की थी. कोर्ट ने इसे 'लग्जरी लिटिगेशन' बताया है. जस्टिस एमएम सुंदरेश और प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने कहा कि इस याचिका पर विचार करने का कोई आधार नहीं है. बेंच ने कहा, 'यह लग्जरी लिटिगेशन है.'
कब से चल रहा मामला?
अनीता आडवाणी ने कोर्ट में ये याचिका 2012 में राजेश खन्ना की मौत के बाद दायर की थी, जब उन्हें उनके बंगले आशीर्वाद से निकाल दिया गया था. इसी बंगले में अनीता आडवाणी और राजेश खन्ना लिव-इन में रहते थे. राजेश खन्ना के आखिरी सालों में अनीता आडवाणी ही उनके साथ थीं. जब उन्हें आशीर्वाद बंगले से बाहर निकाला गया था, तब उन्होंने कहा था कि वह सम्मान चाहती हैं. इसके बाद ही उन्होंने ये याचिका दायर की.
नहीं मिला पत्नी का दर्जा
अनीता ने खुद कई पुराने इंटरव्यूज में दावा किया था कि वह राजेश खन्ना के साथ करीब एक दशक (यानी 2002-2012) तक लिव-इन रिलेशनशिप में थीं. अनीता ने तो ये भी कहा था कि उनकी और राजेश खन्ना की शादी भी हुई थी, जो काफी प्राइवेट रखी गई थी. उनका दावा था कि उन्होंने घर के मंदिर में शादी की थी. हालांकि, अनीता के इस दावे का राजेश खन्ना के परिवार, डिंपल कपाड़िया और ट्विंकल खन्ना ने खंडन किया था.
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अनीता आडवाणी के लिए एक रास्ता खत्म हो गया है, जो लंबे समय से राजेश खन्ना के साथ अपने रिश्ते के लिए पहचान मांग रही थीं. बता दें कि साल 2013 में अनीता आडवाणी ने डिंपल कपाड़िया, उनकी बेटियों और अक्षय कुमार के खिलाफ घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम, 2005 (DVA) के प्रावधानों के तहत एक मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने हर महीने गुजारा भत्ता और बांद्रा में तीन बेडरूम का फ्लैट मांगा था.