Pakistani Cricketer Basit Ali Tribute to Nana Patekar: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को 75 साल की उम्र में निधन हो गया. खबर के मुताबिक, गोवा स्थित उनके घर पर दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ. बीती रात उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें कई फिल्मी सितारे, राजनेता और प्रशंसक शामिल हुए. सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी. नाना पाटेकर के निधन की खबर से उनके प्रशंसकों को गहरा सदमा लगा. उनके निधन पर भारत के साथ-साथ पाकिस्तान से भी शोक संदेश सामने आए. हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर बासित अली ने भी उनके निधन पर दुख जताया.

'उनका देहांत हो गया…'

जहां पाकिस्तानी क्रिकेटर उमर अकमल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी, वहीं पूर्व क्रिकेटर बासित अली ने भी उनके निधन पर दुख जताया और उनसे जुड़ी यादें शेयर कीं. बासित अली ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया. वीडियो में उन्होंने कहा, 'आज सुबह-सुबह मुझे एक दुखद खबर मिली. हमारे प्यारे भाई, दोस्त और एक शानदार इंसान नाना पाटेकर साहब अब इस दुनिया में नहीं रहे. उनका देहांत हो गया है. वे कितने अद्भुत इंसान थे! फिल्मों में उनका अभिनय बिल्कुल वैसा ही था, जैसे वे असल जिंदगी में थे. हमने लतीफ को 'नाना' नाम दिया था. नाना पाटेकर की वजह से ही हमारी पहली बातचीत 1994 में हुई थी और वहीं से सब कुछ शुरू हुआ.'

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'हे बासित, अब अपना ख्याल रखना…'

बासित अली ने आगे कहा, 'अब तो बहुत सारी यादें हैं. आमतौर पर हम महीने में एक या दो बार बात करते थे. जब मेरी मां जीवित थीं और अस्पताल में भर्ती थीं, तो नाना जी हर हफ्ते फोन करते थे. वे मेरी मां के लिए बहुत प्रार्थना करते थे. मेरी मां से भी लंबी बातें करते थे और पुरानी कहानियां सुनाते थे. जब मेरी मां का निधन हुआ, तो उन्होंने मुझसे कहा, 'हे बासित, अब अपना ख्याल रखना. जब मुझे दिल से जुड़ी बीमारी हुई और मैं घर लौटा, तो मुझे एक मैसेज मिला, जिसमें मेरी सेहत के बारे में पूछा गया था और कहा गया था कि जब मैं ठीक हो जाऊं, तो फोन करूं. जब मैंने उन्हें वापस फोन किया, तो उन्होंने स्टेंट लगवाने समेत मेरी बीमारी से जुड़ी हर बात के बारे में पूछा.'

'मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा…'

अपनी बात को पूरा करते हुए आखिर में बासित अली ने कहा, 'वे एक अद्भुत इंसान थे. जो लोग उन्हें सिर्फ फिल्मों के जरिए जानते थे, उनके लिए यह जानना भी खास था कि असल जिंदगी में भी वे वैसे ही थे. लोग उनकी तारीफ करते थे और हमें उनसे कई बार बातचीत करने का सौभाग्य मिला। कभी-कभी हम उनसे किसी फिल्म के किसी खास सीन के बारे में पूछते थे, तो वे मजाक में कहते थे, 'चुप रहो, तुम्हें क्या पता? एक बड़े भाई के रूप में उनका प्यार और स्नेह सचमुच अद्भुत था. मुझे अब भी इस खबर पर यकीन नहीं हो रहा। वे 75 साल के नहीं लगते थे. नाना जी के जितने चाहने वाले पाकिस्तान में थे, उतने ही भारत और पूरी दुनिया में भी थे। लोग उन्हें बहुत प्यार करते थे.'

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