Exclusive: फिल्म 'पूजा मेरी जान' (Pooja Meri Jaan) को लेकर मृणाल ठाकुर ने अपने किरदार और फिल्म के बोल्ड सब्जेक्ट पर खुलकर दिल की बात शेयर की है. अपने करियर में कई अलग-अलग तरह के रोल निभाने वाली मृणाल ने बताया कि 'पूजा' का कैरेक्टर प्ले करना उनके लिए कितना डिफिकल्ट और इंटरनल रहा. साथ ही उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कैसे फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें अहसास हुआ कि समाज में असहज करने वाले मुद्दों पर खुलकर बात करना कितना जरूरी है.
'पूजा' के रोल की तैयारी
जब मृणाल ठाकुर से पूछा गया कि 'पूजा' के किरदार की तैयारी बाकी किरदारों से अलग कैसे थी, तो उन्होंने बताया कि इस रोल के लिए उन्हें अपनी एक्टिंग पर काफी कंट्रोल रखना पड़ा. उन्हें बेहद ध्यान रखना पड़ा कि कितना बयां करना है और कितना दिल में छुपाकर रखना है.
खामोशी को समझने का चैलेंज
एक्ट्रेस ने आगे कहा कि पूजा का सफर बहुत हद तक उसका पर्सनल और इंटरनल था. इसलिए इस रोल की तैयारी सिर्फ सीन समझने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसकी खामोशी, रिएक्शंस और बिना कहे कही गई बातों को महसूस करना था, ताकि ऑडियंस सिर्फ परफॉर्मेंस न देखे बल्कि उसके साथ कहानी को जिए.
असहज बातचीत क्यों है जरूरी?
फिल्म के टॉपिक पर बात करते हुए मृणाल ने कहा कि 'पूजा मेरी जान' जैसी फिल्में इसीलिए बेहद खास हैं, क्योंकि ये असहज करने वाले मुद्दों पर रोशनी डालती हैं. ऐसी ही असहज बातें अक्सर लाइफ में किसी ईमानदार बदलाव या सही बातचीत का स्टार्टिंग पॉइंट बनती हैं.
गलत बर्ताव का नॉर्मलाइज होना
शूटिंग के दौरान का अपना एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए उन्होंने बताया कि सेट पर सीन डिस्कस करते वक्त अक्सर यह अहसास होता था कि समाज में कुछ गलत बर्तावों को कितनी आसानी से नॉर्मल मान लिया जाता है या फिर गलत समझ लिया जाता है.
सिनेमैटिक थीम से परे हकीकत
एक्ट्रेस ने कहा कि यह सिर्फ फिल्मों की कोई कहानी या सिनेमैटिक थीम नहीं है, बल्कि ये वो असल मुद्दे हैं जिन पर हमारे आसपास लोग रोज बातें कर रहे हैं. इसीलिए इस विषय पर खुलकर सामने आना और बात करना बेहद जरूरी था.