Hema Malini on Dharmendra: बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी को फिल्मों में काम करते हुए 60 साल पूरे हो गए हैं. इसी खास मौके पर मुंबई में एक संगीत कार्यक्रम के साथ जश्न मनाया जा रहा है. इस जश्न में उनके साथ सालों तक काम कर चुके कई फिल्ममेकर और सिंगर भी शामिल हुए. इस खास मौके पर एक बार दिवंगत पति धर्मेंद्र को याद कर हेमा मालिनी की आंखें भर आईं. इस दौरान हेमा मालिनी ने बताया कि धर्मेंद्र की आखिरी इच्छा क्या थी? इसके अलावा, उन्होंने अपने फिल्मी सफर को भी याद किया. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर हेमा मालिनी ने क्या कुछ बताया है.

मेरी जिंदगी और करियर…

एचटी सिटी को दिए इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने अपने इस सफर को याद करते हुए कहा, '1970 और 80 का दशक मेरी जिंदगी और करियर का सबसे अच्छा दौर था. मैंने उस समय सबसे ज्यादा फिल्में कीं और निर्देशकों ने मेरा बहुत खूबसूरती से इस्तेमाल किया. वो यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी. लेकिन जिंदगी चलती रहती है; आप सेटल हो जाते हैं, परिवार आ जाता है. फिल्म 'बागबान' (2003) तक मैं अपने एक्टिंग करियर को चला रही थी, फिर मैंने राजनीति में कदम रखा. हालांकि, मैंने डांस करना कभी नहीं छोड़ा. हम इतने खूबसूरत 60 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं. अनिरुद्ध चावला ने मुझे यह करने के लिए प्रेरित किया.'

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मेरे लिए सबसे बड़ा पल…

जब हमने हेमा मालिनी से पूछा कि क्या जब वह धर्मेंद्र की जगह पर पद्म विभूषण लेने के लिए मंच पर गईं तो वह भावुक हो गईं. इसके जवाब में हेमा मालिनी ने कहा, 'यह मेरे लिए इमोशनल और अमेजिंग पल था. उनके 7 दशकों के काम को पहचान मिली. मंच पर जाकर इसे ग्रहण करना मेरे लिए सबसे बड़ा पल था. जब मैं राष्ट्रपति जी की ओर ये पुरस्कार लेने जा रही थी, तब मुझे ऐसा लगा जैसे वह मेरे पीछे खड़े होकर मुझे आगे बढ़ने का इशारा कर रहे हों और कह रहे हों, 'आगे बढ़ो और इसे ग्रहण करो.'

धर्मेंद्र की आखिरी इच्छा…

धर्मेंद्र की आखिरी इच्छा पर बात करते हुए हेमा मालिनी ने कहा, 'धरम जी की यही इच्छा थी कि हम सब खुश रहें. वे अक्सर कहते थे, 'मुझे अपना परिवार बहुत प्यारा है.' हमेशा एकजुट रहने को कहते थे. वे चाहते थे कि हम सब साथ रहें. उन्हें अपने सभी बच्चों और पोते-पोतियों से बहुत प्यार था, जो उस घर में, मेरे घर में रहते थे. उन्होंने भरपूर जीवन जिया. उन्होंने वो सब हासिल किया जो आम इंसान को नहीं मिलता, और वो शुरू से ही जो बनना चाहते थे, वो बन गए.'

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