सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ही गाना छाया हुआ है, 'जब जिद पर आ गईं पार्वती…' जिसपर लोग खूब रील्स और वीडियोज बना रहे हैं, 'हनुमान अंश' की फिल्म का 'पार्वती' गाना है, लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर इसका क्या मतलब है, जो किसी बॉलीवुड की चमक-दमस से दूर बुंदेली लोक अंदाज में सजाया गया है.

क्या है 'पार्वती' गाने का मतलब?

फिल्म 'हनुमान अंश' इन दिनों बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ अपने भक्ति गीतों को लेकर भी चर्चा में है. फिल्म का गाना 'पार्वती' लोगों का खास ध्यान खींच रहा है. गाने की सबसे खास बात इसके बोल हैं. 'जब जिद पे आ गई पार्वती' बुंदेली अंदाज में गाया गया यह लोक भक्ति गीत देवी पार्वती और भगवान शिव की शादी की ऐसी कहानी सुनाता है, जिसे सुनकर चेहरे पर मुस्कान भी आती है और भक्ति का भाव भी जागता है.

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शिव से शादी की जिद पर अड़ गईं पार्वती

गाने की कहानी उस समय की है जब माता पार्वती भगवान शिव को अपना जीवनसाथी बनाने का संकल्प ले चुकी थीं. शिव को पाने के लिए उन्होंने कठोर तपस्या शुरू कर दी, लेकिन सप्तर्षियों को लगा कि पार्वती एक ऐसे तपस्वी से शादी करने जा रही हैं, जिनका संसार की सुख सुविधाओं से कोई लेना-देना नहीं है.

सप्तर्षियों ने की पार्वती को समझाने की कोशिश

उन्होंने पार्वती को समझाने की कोशिश की. शिव की वेशभूषा से लेकर उनके रहन-सहन तक का हवाला दिया गया. गले में सांप, शरीर पर भस्म और सांसारिक मोह से दूरी यानी सप्तर्षियों की नजर में शिव एक 'बेमेल दूल्हा' नजर आते हैं, लेकिन पार्वती अपनी जिद से पीछे हटने को तैयार नहीं होतीं.

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'जब जिद पे आ गई पार्वती' क्यों है खास?

गाने की यही लाइन इसकी पूरी कहानी का सार है. सप्तर्षि अपनी तरफ से पार्वती को समझाने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन उनका फैसला अटल रहता है. गीत इस पूरे प्रसंग को गंभीर तरीके से नहीं, बल्कि बुंदेली लोक अंदाज और हल्के-फुल्के हास्य के साथ पेश करता है. यही वजह है कि 'पार्वती' बाकी भक्ति गीतों से काफी अलग सुनाई देता है.

बॉलीवुड भजन नहीं, लोककथा जैसा एहसास

'पार्वती' को साधु एस तिवारी ने लिखा, कंपोज और गाया है. संगीत प्रोडक्शन में समीरन दास का योगदान है. गाने में तबला, परकशन और दूसरे लोक वाद्यों का इस्तेमाल किया गया है. इसकी धुन और गायकी में बुंदेली मिट्टी की खुशबू महसूस होती है.

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सोशल मीडिया पर बटोर रहा प्यार

यही वजह है कि यह गाना किसी भव्य बॉलीवुड भजन की तरह नहीं, बल्कि गांव की चौपाल में सुनाई जाने वाली लोककथा जैसा लगता है. भगवान शिव और माता पार्वती की प्रेम और विवाह की कहानी को इस देसी अंदाज में सुनना दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है. सोशल मीडिया पर भी गाने के वीडियो और ऑडियो को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है.