Gandhi Jayanti: 2 अक्टूबर का नाम सुनते ही सबसे पहले महात्मा गांधी और गांधी जयंती याद आती है, लेकिन पिछले करीब एक दशक में इस तारीख का एक और कनेक्शन लोगों की जुबान पर चढ़ गया है और वो है अजय देवगन की फिल्म 'दृश्यम', आज 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' के रिलीज होते ही एक बार फिर सोशल मीडिया पर 2 अक्टूबर, पणजी, सत्संग और पाव भाजी के मीम्स वायरल हो रहे हैं.
2 अक्टूबर और विजय सलगांवकर का कनेक्शन
'दृश्यम' की कहानी में विजय सलगांवकर अपने परिवार को बचाने के लिए एक ऐसी कहानी तैयार करता है, जिसे वह पुलिस के सामने बार-बार दोहराता है. उसके मुताबिक 2 अक्टूबर को वह परिवार के साथ पणजी गया था, सत्संग में शामिल हुआ और पाव भाजी खाई थी. कहानी में ये छोटी-छोटी बातें विजय के लिए बेहद जरूरी थीं, क्योंकि इन्हीं के सहारे वह अपने परिवार के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करता है.
दर्शकों के दिमाग में बैठी विजय की कहानी
फिल्म की खास बात ये रही कि विजय की बनाई कहानी सिर्फ पुलिस तक सीमित नहीं रही, बल्कि दर्शकों के दिमाग में भी हमेशा के लिए बैठ गई. अब 2 अक्टूबर आते ही लोग गांधी जयंती के साथ 'दृश्यम' को भी याद करने लगते हैं.
एक तारीख बनी पॉप कल्चर का हिस्सा
आमतौर पर फिल्मों के डायलॉग या सीन पॉपुलर होते हैं, लेकिन 'दृश्यम' का मामला थोड़ा अलग है, यहां एक पूरी तारीख फिल्म की पहचान बन गई. 2 अक्टूबर, पणजी, सत्संग और पाव भाजी. इन चार चीजों का जिक्र होते ही लोगों को विजय सलगांवकर की कहानी याद आ जाती है.
सोशल मीडिया ने कनेक्शन को किया मजबूत
सोशल मीडिया ने इस कनेक्शन को और मजबूत किया. हर साल 2 अक्टूबर पर 'दृश्यम' के मीम्स और डायलॉग्स दोबारा वायरल होने लगते हैं. कई ब्रांड्स ने भी अपने कैंपेन में पाव भाजी और 'दृश्यम' के संदर्भ का इस्तेमाल किया है.
2 अक्टूबर को ही क्यों रिलीज हुई फिल्म?
अब दिलचस्प बात ये है कि 'दृश्यम' फ्रेंचाइजी की तीसरी और आखिरी फिल्म भी 2 अक्टूबर को रिलीज हुई है. यानी जिस तारीख को विजय ने अपनी कहानी का सबसे अहम हिस्सा बनाया था, उसी तारीख पर अब उसकी कहानी का आखिरी अध्याय दर्शकों के सामने है.
क्यों 2 अक्टूबर को रिलीज हुई 'दृश्यम 3'?
अजय देवगन ने फिल्म का ट्रेलर शेयर करते हुए भी लिखा था, 'जो कहानी 2 अक्टूबर से शुरू हुई थी, वो 2 अक्टूबर को ही खत्म होगी.' यही वजह है कि 2 अक्टूबर अब सिर्फ गांधी जयंती की तारीख नहीं रह गई है. सिनेमा के दर्शकों के लिए ये विजय सलगांवकर, पणजी, सत्संग और पाव भाजी की याद भी बन चुकी है.