Bharat Kapoor Death Reason: हिंदी सिनेमा ने एक और अनुभवी कलाकार को खो दिया है. दिग्गज अभिनेता भरत कपूर का निधन फिल्म जगत के लिए एक बड़ी क्षति है. पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत काफी नाजुक थी, जिसके चलते उन्होंने मुंबई के सायन अस्पताल में अंतिम सांस ली. भरत कपूर ने अपने चार दशक लंबे करियर में 'नूरी', 'लव स्टोरी' और 'साजन चले ससुराल' जैसी कई यादगार फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी की छाप छोड़ी थी. उनके निधन की खबर से उनके प्रशंसक और पूरा बॉलीवुड स्तब्ध है. वहीं फैंस उनके निधन की असली वजह भी जानना चाहते हैं. जहां भरत कपूर के करीबी दोस्त ने उनके निधन की वजह का खुलासा किया है.

क्या थी निधन की असली वजह?

भरत कपूर के करीबी दोस्त और अभिनेता अवतार गिल ने उनके निधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भरत कपूर पिछले काफी समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे. बीते तीन दिनों में उनकी स्थिति काफी गंभीर हो गई थी. अस्पताल में इलाज के दौरान उनके शरीर के कई अंगों ने एक साथ काम करना बंद कर दिया था, जिसे मेडिकल भाषा में 'मल्टीपल ऑर्गन फेलियर' कहते हैं. इसी वजह से उन्होंने दम तोड़ दिया. सोमवार शाम को ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया.

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चार दशक लंबा फिल्मी सफर

15 अक्टूबर 1945 को जन्मे भरत कपूर का एक्टिंग करियर लगभग 40 साल लंबा रहा. उन्होंने 70 के दशक में अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी. भरत कपूर उन दुर्लभ अभिनेताओं में से थे, जो भले ही फिल्म के पोस्टरों पर मुख्य चेहरे के रूप में न दिखें, लेकिन स्क्रीन पर आते ही अपनी दमदार मौजूदगी से पूरे सीन का रुख बदल देते थे. छोटे रोल को भी उन्होंने इतनी शिद्दत से निभाया कि दर्शक उन्हें हमेशा याद रखेंगे.

यादगार फिल्मों का हिस्सा

भरत कपूर की फिल्मों की लिस्ट काफी लंबी और प्रभावशाली है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में 'नूरी', 'राम बलराम' और 'लव स्टोरी' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया, जिसने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई. इसके अलावा, उन्होंने 'बाजार', 'गुलामी', 'आखिरी रास्ता' और 'सत्यमेव जयते' जैसी गंभीर विषयों वाली फिल्मों में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया.

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90 के दशक और उसके बाद का योगदान

भरत कपूर केवल पुराने दौर के कलाकार नहीं थे, बल्कि उन्होंने 90 के दशक में भी अपनी सक्रियता बनाए रखी. 'स्वर्ग', 'खुदा गवाह' और 'रंग' जैसी हिट फिल्मों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं. इतना ही नहीं, 'बरसात', 'साजन चले ससुराल' और 2004 में आई 'मीनाक्षी: अ टेल ऑफ थ्री सिटीज' जैसी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया. उन्होंने खुद को हर दौर के सिनेमा के साथ ढालना बखूबी सीखा था.

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बॉलीवुड के लिए एक बड़ी क्षति

भरत कपूर का जाना एक युग का अंत जैसा है. वे एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने साइड रोल्स को भी मुख्य किरदारों जितनी अहमियत दी. उनके निधन से बॉलीवुड ने एक ऐसा अनुभवी साथी खो दिया है जो सिनेमा के बदलते दौर का गवाह था. भले ही आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में और उनके द्वारा निभाए गए किरदार हमेशा सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेंगे.

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