Anant Ambani के 31वें बर्थडे पर एक ऐसा ऐलान हुआ, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया है. जानवरों के प्रति अपने प्यार के लिए पहचाने जाने वाले अनंत अब एजुकेशन के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठा रहे हैं. उनके ड्रीम प्रोजेक्ट 'वनतारा' को अब एक नया आयाम मिला है 'वनतारा यूनिवर्सिटी' के रूप में…
अनंत अंबानी से क्यों हैं लोग इंप्रेस
एंटरटेनमेंट की दुनिया में अकसर स्टार्स अपने बर्थडे पर पार्टियां या खास पोस्ट करते हैं, लेकिन अनंत अंबानी ने इस बार कुछ ऐसा किया, जिसने लोगों को सच में इंप्रेस कर दिया. उन्होंने 'वनतारा यूनिवर्सिटी' की नींव रखकर ये साफ कर दिया, कि उनका फोकस सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति की सेवा भी है.
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वनतारा इकोसिस्टम का हिस्सा बनने जा रही यूनिवर्सिटी
गुजरात के जामनगर में तैयार हो रहे वनतारा इकोसिस्टम का हिस्सा बनने जा रही ये यूनिवर्सिटी पढ़ाई के पुराने तरीकों को बदलने का दावा कर रही है. यहां सिर्फ किताबों से ज्ञान नहीं मिलेगा, बल्कि स्टूडेंट्स को जानवरों के बीच रहकर, उनके साथ काम करते हुए, सीखने का मौका मिलेगा. यानी क्लासरूम और रियल लाइफ का परफेक्ट कॉम्बिनेशन.
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क्यों यूनिवर्सिटी है युवाओं के लिए खास?
खास बात ये है, कि ये यूनिवर्सिटी उन युवाओं के लिए एक सुनहरा मौका होगी, जो एनिमल केयर, वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन और वेटरनरी साइंस में करियर बनाना चाहते हैं. अब तक भारत में इस तरह की प्रैक्टिकल और बड़े स्तर की सुविधा बहुत कम देखने को मिलती है.
इस बात पर निर्भर करता है संरक्षण का भविष्य
अनंत अंबानी ने इस मौके पर कहा, कि संरक्षण का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है, कि हम लोगों को करुणा, ज्ञान और सही कौशल के साथ कैसे तैयार करते हैं? उन्होंने बताया, कि इस यूनिवर्सिटी की सोच एक पर्सनल एक्सपीरियंस से आई है. जब उन्होंने जानवरों को तकलीफ में देखा और महसूस किया, कि उनकी देखभाल के लिए और बेहतर सिस्टम की जरूरत है.
क्या है प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी की परंपरा?
इतना ही नहीं, इस पहल की इंस्पीरेशन भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा से भी ली गई है, उन्होंने कहा, 'खासकर प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी की परंपरा और 'आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वत:' की भावना से इंसपायर्ड होकर…जिसका अर्थ है, कि हमारे पास सभी दिशाओं से नेक विचार आएं, ये यूनिवर्सिटी एक ऐसी नई पीढ़ी को तैयार करना चाहती है, जो हर जीवन की रक्षा के लिए समर्पित हो.' बहरहाल, अनंत अंबानी का ये कदम सिर्फ एक यूनिवर्सिटी खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि ये एक नई सोच की शुरुआत है, जहां करियर और करुणा साथ-साथ चलेंगे.