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Janhit Mein Jaari Movie Review: क्लाइमेक्स तक हंसाएगी, सेफ सेक्स और कंडोम के बारे में समझाएगी, MUST WATCH

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सूचना जनहित में जारी है, ये फिल्म बड़े-बड़े स्टार्स, बड़े-बड़े बजट पर भारी है। ट्रेलर देखक मन में खटका सा जगा था, और अंदर कहीं उम्मीद भी थी कि पिक्चर तो शानदार होगी। ऐसे में फिल्म के प्रोड्यूसर ने दो फैसले किए, पहला कि फिल्म की रिलीज़ से 4 दिन पहले ही हमें फिल्म दिखाने का और रिलीज़ के दिन यानि 10 जून को पूरे हिंदुस्तान को सिर्फ़ 100 रूपए प्रति टिकट पर थियेटर में बुलाने का, तो लगा कि इनता कॉन्फीडेंस?, कोई बात तो ज़रूर होगी फिल्म में।

  ये फिल्म कई मायनों में बॉलीवुड की लीग से हटकर अपनी लकीर खींचती है। पहली एक हीरोइन लेड फिल्म, क्या ही कर पाएगी ? कम बजट की फिल्म में कहां तक पहुंच पाएगी ? और सबसे बड़ी बात, जिस कंडोम की बात दोस्तों की बीच फुस्स-फुसी वाली आवाज़ तक सिमटी रह जाती है, उसी के बारे में बनी फिल्म क्या लोग थियेटर में देखने जाएंगे ? तो पहला जवाब है कि इस हीरोइन लेड फिल्म ने कमाल कर दिया है, दूसरा जवाब है कि कम बजट और बड़े-बड़े स्टार्स से नहीं, फिल्म अच्छी स्क्रिप्ट, बढ़िया डायरेक्शन और शानदार एक्टिंग के भरोसे चलती है, जो जनहित में जारी में पूरी तरह से भरा हुआ है और तीसरा जवाब ये कि जिस कंडोम को लेकर आप अब तक फुसफुसाते रहे हैं, उसके बारे में ये फिल्म देखकर थोड़ा समझ जाएंगे, नहीं देखेंगे, तो पछताएंगे।

 

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अब आते हैं फिल्म की कहानी पर। कहानी सेट है, मध्य प्रदेश के ओरछा में, जहां रहती हैं मनोकामना त्रिपाठी। अब मनोकामना की कामना तो हर कोई करता है, फैमिली चाहती है कि मनोकमना उनकी कामना पूरी करें और शादी करें। मनोकमाना चाहती हैं उसकी कामना पूरी हो, और नौकरी मिले। छोटे से शहर ओरछा की मनोकामना, छिप-छिप लो-फैट Wheat बीयर पीती है और बचपन से मनोकामना की कामना लेकर दोस्ती की आड़ में छिप-छिप कर प्यार जताने वाले देवी, शादी के लिए अपने परफेक्ट होने का सुबूत देते पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन बना रहे होते हैं।

शादी से दूर भागती मनोकमाना से आदरणीय जी टकराते हैं और अपनी डूबती कंपनी लिटिल अबंरेला यानि फ्लेवर्ड कंडोम बनाने वाली फैक्ट्री के मालिक, 40 हज़ार रूपए महीने में काम करने की पेशकश थमाते हैं। ओरछा की लोअर मिडिल क्लास फैमिली की लड़की क्या कंडोम बेचेगी ? इस बात पर, घर वाले फड़फड़ाते हैं फिर मान जाते हैं, लेकिन मनोकामना के प्यार में डूबे रंजन जी, शादी के पहले अपने घर वालों से ये बात छिपाते हैं और छतरी की फैक्ट्री वाला बहाना थमाते हैं। ये बात खुलनी थी, हंगामा होना था, मनोकामना का घर जलना था, ये सब कुछ होना था, लेकिन फिर मनोकामना को अहसास होता है कि कंडोम की बात दबानी नहीं है, बोलनी है और सबको बतानी है। सेफ सेक्स के बारे में समझाना है, अबॉर्शन से होने वाले ख़तरों के बारे में लोगों को जागरूक करना है। क्या मनोकामना की फैमिली ये बात मानेगी ? ससुराल कंडोम बेचने वाली बहू को अपनाएगा ? पति, अपनी पत्नी का साथ दे पाएगा ? इन सबका जवाब हां है, लेकिन कैसे ? यही तो फिल्म है।

 

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जनहित में जारी एक टैबू टॉपिक पर बनी, बेहतरीन और शानदार फिल्म है, जो आप को एक बार हंसाना शुरु करेगी, तो क्लाइमेक्स तक हंसाती ही जाएगी। थोड़ा समझाएगी, कुछ मिनटों के लिए इमोशनल झटके भी देगी, और फिर से हंसाते-हंसाते लॉफ्टर की डोज़ देती जाएगी। ये बिल्कुल उस वायरल वीडियो की तरह है, जिसमें एक छोटे से बच्चे को इंजेक्शन लगाने के पहले डॉक्टर उसे बहलाता है, तो फिर धीरे से इंजेक्शन लगा देता है और बच्चे को पता भी नहीं चलता। राइटर राज शांडिल्य ने इस फिल्म के स्क्रीन प्ले को ऐसे ही लिखा है, हंसाते-हंसाते वो इंजेक्शन लगा देते हैं और दिमाग़ में बिठा देते हैं कि कॉन्डोम, सेफ सेक्स लिए कितना ज़रूरी है। डायरेक्टर जय बसंतू सिंह ने, जनहित में जारी से फिल्मों में अपना डायरेक्टोरियल डेब्यू किया है, और फिल्म का ऐसा साधा है कि स्टोरी, स्क्रीनप्ले, सिनैमैटोग्राफ़ी, बैकग्राउंड स्कोर, एक्टिंग सब कुछ इस कैप्टन के हिसाब से ही हुआ है।


परफॉरमेंस पर आइएगा, तो इस ज़ाहिर है नुसरत इस फिल्म की लीड हैं, बेहतरीन एक्ट्रेस हैं, और जनहित में जारी को सिर्फ़ उन्होने अपने कंधों पर उठाया ही नहीं है, बल्कि बहुत खूबी से मंज़िल तक पहुंचाया है। जनहित में जारी से अनुद सिंह ढाका ने अपना एक्टिग डेब्यू किया है, उनमें ज़बरदस्त स्पॉर्क है। अनुद लंबी रेस खेलने यहां आए हैं। पारितोष पति त्रिपाठी, जो टीवी के बेहतरीन होस्ट हैं, उन्होने इस फिल्म में मनोकामना के आशिक देवी के किरदार में ऐसी जान डाली है, कि उन्हे इस फिल्म का स्टार मान लीजिए। पारितोष के बाद अब ऑफर्स की झड़ी लगनी तय है। आदरणीय बने बिजेंदर काला, अपने छोटे से किरदार में कमाल हैं। मनोकामना की मां और पिता के किरदार में सपना सैंड और इश्तियाक ख़ान ने जो समां बाधा है, वो आपके पेट में हंसी के मरोड़ पैदा कर देगा। विजयराज के तो कहने ही क्या, शानदार एक्टर हैं वो। फिर दादाजी के छोटे से किरदार में टीनू आनंद ने कमाल ही कर दिया है।

जाइए, देखिए, ठहाके लगाए और कुछ सीखकर आइए।

जनहित में जारी को 4 स्टार।

 

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