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Heropanti 2 Review: टाइगर की हीरोपंती 2 देखने से अच्छा है, आंखे बंद करके सो जाइए ।

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थियेटर में जाकर हीरोपंती 2 देखने का ख्याल मन में आ रहा है। तुरंत इसे निकाल फेकिए… क्योंकि ये फिल्म है ही नहीं, रायता है। जो फैलाया गया है, वो भी 2 घंटे 15 मिनट का। टाइगर श्रॉफ़ जो काम अपने इंस्टाग्राम रील्स में करते हैं, वही काम फिल्म में कर रहे हैं। तो अगर आपको एक्शन देखना है, तो इंस्टाग्राम पर फ्री में देखिए, उसके लिए थियेटर जाकर टाइम और पैसा ख़र्चने की ज़रूरत नहीं है। तारा सुतारिया ने तो खुद से ही कोई उम्मीद नहीं की होगी, तो फिल्म में उनसे उम्मीद करने का सवाल ही पैदा नही होता। खैर फिल्म की कहानी प्रोड्यूसर साजिद नाडियाडवाला ने लिखी है, तो कोई इस पर क्या ही सवाल उठाए। मगर फिर पैसा भी उनका, तो अगर आप अपने ही पैसे को उड़ाना चाहें, तो कोई आपको रोके भी क्यों….?


कहानी सुनिएगा… तो ट्रेलर में जो देखा है, कहानी वही है। बबलु राणावात, एक हैकर है। लैला, एक इंटरनेशनल क्रिमिनल है, मगर समझता खुद को जादुगर है। सीबाआई के खान सर को लैला की साजिश रोकने के लिए बबलु राणावत की ज़रूरत है। क्योंकि लैला, 31 मार्च को इंडिया के हर अकाउंट से पैसे निकालकर, 1 अप्रैल को पूरे हिंदुस्तान के साथ अप्रैल फूल खेलना चाहता है। 31 मार्च ही क्यों… क्यों लैला को लगता है कि पूरा हिंदुस्तान 31 मार्च को अपना टैक्स जमा करता है, अकाउंट्स की सालाना क्लोज़िंग करता है। कहानी, अक्लमंदी के औसत से जितनी नीचे है… उससे नीचे भी फिल्म का हर किरदार गिरता है, और उससे नीचे फिल्म के डायलॉग्स गिरते हैं, जिसे रजत अरोड़ा ने लिखा है। ये वही रजत अरोड़ा है, जिन्होने डर्टी पिक्चर, वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई जैसी शानदार फिल्मों के स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स लिखे हैं।

बम पर तिल का निशान देखकर, अपने हीरो को पहचानने वाली हीरोइन का सेक्वेंस, हीरोपंती 2 में कॉमेडी के लिए लिखा गया है। इसलिए याद रखिए, कि इस फिल्म को हंसी में उड़ाना भी आसान नहीं है।

अहमद ख़ान ने फिल्म को डायरेक्ट किया है। वैसे ही, जैसे उनसे उम्मीद की जाती है यानि गाने डायरेक्ट किए हैं, बीच-बीच में कहीं-कहीं सीन्स डाल दिए हैं। गाने की कोरियोग्राफी शानदार की गई हैं, लेकिन एक भी गाना आपको फिल्म ख़त्म होने के बाद याद रहने वाला नहीं है। और फिल्म तो खैर आप थियेटर के अंदर रहकर भी याद नहीं रखना चाहेंगे।
टाइगर श्रॉफ एक्शन और डांस अच्छा करते हैं बाकि कुछ और करने के लिए शायद उन्हे डायरेक्टर ने भी नहीं कहा.. और प्रोड्यूसर की तो पूछिए ही नहीं। खुद को स्टार समझकर अगर टाइगर ने डांस और एक्शन को ही एक्टिंग समझना जारी रखा, तो उनके लिए आगे की राह आसान नहीं होने वाली। नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने हिंदी और एक्टिंग को लेकर बड़े-बड़े इंटरव्यू दिए, और हीरोपंती 2 में अपने कैरेक्टर के इर्द-गिर्द होने वाले रायते को देखते रहें…. लैला जैसा किरदार, हीरोपंती 2 में बेकार साबित हुआ है। तारा सुतारिया ने शायद यही समझ लिया है कि एक्टिंग करने का मतबल खूबसूरत लगना होता है। बॉलीवुड पर लगते इल्ज़ामों को सही साबित करती है हीरोपंती 2, जिसमें अमृता सिंह भी इस बार पिसी हैं।

जब करने के लिए कुछ ना हो, तो भी हीरोपंती 2 ना देखिए… सो जाइए, सिर दर्द से आराम मिलेगा।
हीरोपंती 2 को डेढ़ स्टार।

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