जब मधुबाला का निधन हुआ तो किशोर कुमार ने दिया था जनाजे को कांधा, दिलीप कुमार आखिरी दर्शन भी नहीं कर पाए थे

When Madhubala's sister Madhur shared stories of her sister's tragic life in he old interview: पूजा राजपूत – बॉलीवुड फिल्मों का वो हसीन चेहरा जिसकी खूबसूरती की मिसाल आज भी दे जाती है वो है ‘मधुबाला’। बेमिसाल खूबसूरती की मल्लिका मधुबाला को ‘वीनस ऑफ हिन्दी सिनेमा’ कहा जाता है। मधुबाला जैसी दिलकश अभिनेत्री आजतक बॉलीवुड में नहीं हुई। लेकिन अफसोस मधुबाला की जिंदगी का सफल बेहद छोटा रहा। 14 फरवरी को 1933 को जन्मी मधुबाला ने 23 फरवरी 1969 को महज़ 36 साल की उम्र में दमम तोड़ दिया था।

मधुबाला हिन्दी की फिल्मों की सबसे चर्चित अभिनेत्री थीं। 7 साल की उम्र में बतौर बाल कलाकार फिल्मी सफर शुरु करने वाली मधुबाला ने अपने करियर में कई शानदार फिल्मों में यादगार अभिनय किया । उन्हें आज भी मुगल-ए-आज़म की अनारकली के तौर पर याद किया जाता है। 

मधुबाला का छोटा सा फिल्मी सफर जितना शानदार था उनका निजी जीवन उतनी ही कठिनाईयों से भरा रहा था। मधुबाला को आज भी याद किया जाता है, लेकिन सिर्फ उनके यादगार अभिनय और बेमिसाल खूबसूरती की वजह से ही नहीं, बल्कि उस दर्द की वजह से भी जिससे भरी रही थी उनकी छोटी सी जिंदगी।

Madhubala को अपनों ने ही दिल का दर्द दिया था और अंत में वो दिल भी उन्हें धोखा दे गया था। मधुबाला की जिंदगी के कई जख्मों का खुलासा उनकी छोटी बहन मधुर भूषण ने बाद में अपने इंटरव्यू में किया था।

मधुर अपनी बड़ी बहन को ‘आपा’ कहकर पुकारती थीं। मधुर के मुताबिक, उनकी आपा अपने आखिरी वक्त में उस शख्स से मिलने के लिए तड़पती रहीं जिसे उन्होने दिल की गहराईयों से चाहा था। मधुबाला के दिल में छेद था। और इस गंभीर बीमारी का पता चलने के बाद वो बिल्कुल अकेली रह गई थीं। उनकी जिंदगी में सिर्फ वो थीं...उनका दर्द था...और किशोर कुमार का इंतज़ार था। 

मधुर ने बताया था, कि मधुबाला की जिंदगी में प्यार की बहार लाने वाले सबसे पहले शख्स प्रेमनाथ थे। लेकिन दोनों का रिश्ता सिर्फ 6 महीने ही चल पाया था। प्रेमनाथ चाहते थे कि मधुबाला अपना धर्म बदल लें। जो कि मधुबाला को मंजूर नहीं था। ये रिश्ता धर्म की भेंट चढ़ गया।

प्रेमनाथ के बाद मधुबाला की जिंदगी में दिलीप कुमार आए थे। दिलीप कुमार और मधुबाला की मुलाकात 1951 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘तराना’ के सेट पर हुई थी। दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे थे और निकाह भी करना चाहते थे। मधुबाला की छोटी बहनें दिलीप कुमार को प्यार से ‘भाईजान’ कहकर पुकारा करती थीं। मधुर ने अपने इंटरव्यू में खुलासा किया था कि मधुबाला के लिए दिलीप का रिश्ता लेकर उनकी बहन आईं थी और अपने साथ शगुन का दुप्पट्टा भी लाई थीं। हांलाकि मधुबाला और दिलीप कुमार का रिश्ता एक ‘कोर्ट केस’ की भेंट चढ़ गया था।

फिल्म ‘नया दौर’ की शूटिंग के दौरान निर्देशक बीआर.चोपड़ा ने मधुबाला के खिलाफ केस कर दिया था, जिसमें दिलीप कुमार ने मधुबाला और उनके पिता के खिलाफ गवाही दी थी। यहीं से दोनों के रिश्ते में दरार आ गई थी। मधुर को हमेशा दिलीप कुमार से यही शिकायत रही कि उन्होने मधुबाला का साथ क्यों नहीं दिया। अपने उस इंटरव्यू में मधुर ने कहा था कि “आपकी मोहब्बत यहां थी...आपकी चाहत यहां थी...फिर आपने ऐसा क्यों किया...भाईजान मामला सुलझाने के लिए कह सकते थे कि फिल्म की लोकेशन चेंज कर देते हैं।”

दिलीप कुमार की गवाही को मधुबाला ने अपने लिए धोखा माना था, ये धोखा उनके दिल को ज़ख़्मी कर गया था जो बाद में नासूर बन गया। हांलाकि, दिलीप कुमार से ब्रेकअप के बाद मधुबाला ने साल 1960 में किशोर कुमार से शादी कर ली थी। उस वक्त मधुबाला की उम्र सिर्फ 27 साल थी।

मधुबाला किशोर कुमार की पत्नी तो बन गई थीं, लेकिन कभी उन्हें बहू का दर्जा नहीं मिला था। किशोर कुमार के परिवार ने उन्हें कभी बहू के तौर पर नहीं अपनाया था। शादी के बाद मधुबाला और किशोर कुमार हनीमून के लिए लंदन गए थे। लंदन में ही मधुबाला को पहली बार अपनी बीमारी के बारे में पता चला था। डॉक्टर्स ने मधुबाला को कहा था कि उनके पास जिंदगी के सिर्फ दो साल हैं।

मधुर भूषण ने इंटरव्यू में ज़िक्र किया था “लंदन से लौटने के बाद किशोर कुमार उन्हें हमारे घर छोड़ गए थे ये कहते हुए कि आउटडोर शूटिंग्स की वजह से वो उनका ख्याल नहीं रख सकते हैं।” मधुर के मुताबिक “मधुबाला आपा उनके साथ रहना चाहती थीं। लेकिन वो उनसे मिलने के लिए सिर्फ दो महीनों में एक बार आते थे। उन्होने कभी उनका अपमान नहीं किया था। आपा के इलाज का सारा खर्चा भी उन्होने उठाया था। आपा की आखिरी सांस तक वो शादीशुदा रहे। लेकिन उनकी जिंदगी में दर्द कम नहीं हुआ।”

अपनी बड़ी बहन के आखिरी पलों को याद करते हुए मधुर ने खुलासा किया था कि आखिरी दिनों में सिर्फ हड्डियों का ढांचा बन गई थीं। और वक्त रोती रहती थीं। रोते हुए वो सिर्फ एक ही बात बोलती रहती थीं कि “मुझे जिंदा रहना है...मुझे मरना नहीं है...डॉक्टर्स कब इलाज निकालेंगे।”

लेकिन इस दर्द ने मधुबाला का साथ कभी नहीं छोड़ा। और आखिरकार 23 फरवरी 1969 को मधुबाला अपने टूटे दिल और दिल के दर्द के साथ दुनिया से अलविदा कह गईं।

मधुबाला का अंतिम संस्कार इस्लामिक रीति रिवाज से हुआ था। मुंबई के जुहू कब्रिस्तान में उन्हें दफनाया गया था। किशोर कुमार ने पत्नी के शव को कांधा दिया था, इस तस्वीर में उनके चेहरे पर पत्नी को खो देने की मायुसी साफ दिख रही हैं। वहीं दिलीप कुमार तो उनके आखिरी दर्शन भी नहीं कर पाए थे। दिलीप कुमार उस वक्त चेन्नई में थे। वहां से लौटकर वो मधुबाला की कब्र पर गए और फूल चढ़ाया था।