जब Gulshan Kumar ने अबु सलेम को 10 करोड़ देने की बजाए कहा था- इतने में तो माता का भंडारा करवा दूंगा

पूजा राजपूत  - बॉलीवुड में कई शख्सियतें ऐसी हैं जिन्होने फर्शसे अर्श तक सफर तय है। ऐसी ही शख्सियतों में से एक थे गुलशन कुमार। गुलशन कुमार ने बॉलीवुड में सिर्फ सफलता का इतिहास ही नहीं रचा था, बल्कि लोगों के जीवन में भक्ति का वो रस घोला था जिसकी वजह से उन्हें आज भी याद किया जाता है। गुलशन कुमार आज हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन यदि आज वह होते तो 65 वर्ष के हो गए होते। आज 5 मई को गुलशन कुमार का जन्मदिन होता है। लेकिन अफसोस अपने जन्मदिन की खुशियां मनाने के लिए वह अपने परिवार के बीच मौजूद नहीं हैं।  23 साल पहले बेहद बेरहमी से गुलशन कुमार को मौत के घाट उतारा गया था। गुलशन कुमार हत्याकांड(Gulshan Kumar Death Case) फिल्म इंडस्ट्री के सबसे चर्चित और विवाद डेथ केस में से एक है।

12 अगस्त 1997 को कैसेट किंग के नाम से मशहूर गुलशन कुमार(Gulshan Kumar) की हत्या अंधेरी स्थित शिव मंदिर के बाहर गोलियों से छलनी करके कर दी गई थी।

कहा जाता है कि अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को गुलशन कुमार की हत्या की सुपारी नदीम-श्रवण(Nadeem-Shravan) के नाम से मशहूर संगीतकार जोड़ी के नदीम सैफी(Nadeem Saifi) ने ही दी थी। इस हत्याकांड में नाम सामने आने के बाद नदीम सैफी भारत से भागकर लंदन में जा बसा था। और नदीम-श्रवण की जोड़ी भी साल 2005 में टूट गई थी। 

टी-सीरिज आज देश की सबसे बड़ी म्यूज़िक कम्पनी और फिल्म प्रोडक्शन हाउस है। इस कंपनी की नीव बरसों पहले गुलशन कुमार ने ही रखी थी। बचपन में गुलशन कुमार दरियागंज में एक जूस की दुकान पर जूस बेचा करते थे। 80 के दशक में उनके पिता ने कैसेट्स रिकॉर्डिंग और रिपेयरिंग की दुकान खोल ली, तो गुलशन कुमार को संगीत के प्रति लगाव हो गया। बाद में गुलशन कुमार ने दिल्ली से सटे नोएडा में छोटा सा रिकॉर्डिंग स्टूडियो खोल सुपर कैसेट्स कंपनी की नींव रखी। अगले कुछ साल में टी-सीरिज़ देश की सबसे बड़ी म्यूज़िक कंपनी बन गई। 

उन्हीं दिनों में गुलशन कुमार की कई फिल्मों और म्यूज़िक एल्बमस में नदीम-श्रवण की जोड़ी ने संगीत दिया था। नदीम-श्रवण की जोड़ी को ऊंचाई तक पहुंचाने वाले ही गुलशन कुमार ही थे। लेकिन किन्हीं मुद्दों पर नदीम सैफी और गुलशन कुमार के बीच मनमुटाव बढ़ गया था।

बताया जाता है, कि नदीम तब अपने करियर को लेकर इस हद तक इनसिक्योर हो गए थे कि उन्होने अंडरवर्ल्ड डॉन(Underworld Don) अबु सलेम(Abu Salem) को गुलशन कुमार की हत्या की सुपारी दे दी थी।

तब अबू सलेम हाथ धोकर गुलशन कुमार के पीछे पड़ गया था। अबू सलेम ने गुलशन कुमार से 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। जिसे गुलशन कुमार ने सुनकर भी अनसुना कर दिया था। हुसैन जैदी ने अपनी किताब My Name is Abu Salem में लिखा था कि जब अबु सलेम ने गुलशन कुमार से 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी, तब गुलशन कुमार ने बिना डरे यह जवाब दिया था कि इतने में तो मैं वैष्णो देवी में भंडारा करवा दूंगा... अबु सलेम को गुलशन कुमार का ये जवाब इतना बुरा लगा था कि उसने अपने दो शार्प शूटर्स दाऊद मर्चेंट और विनोद जगताप को गुलशन कुमार की हत्या करने की जिम्मेदारी दे दी। 

12 अगस्त 1997 को गुलशन कुमार हमेशा की तरह जीतेश्वर महादेव मंदिर में पूजा करने जा रहे थे। तब इन दोनों शार्पशूटर्स ने गुलशन पर हमला बोल दिया। शूटर ने गुलशन पर गोलियां चलाते हुए कहा था- बहुत पूजा कर ली। अब ऊपर जा के करना।

16 गोलियों से गुलशन कुमार की जान ले ली गई। इस दौरान गुलशन कुमार की जान बचाने की कोशिश उनके ड्राइवर ने भी की लेकिन इस हमले में वो भी घायल हो गया था। 

दिन-दहाड़े जिस तरह से गुलशन कुमार को गोलियों से छलनी कर दिया गया था उस हत्याकांड से हर कोई सन्न रह गया था। साथ ही फिल्म इंडस्ट्री में अबु सलेम के नाम की दहशत हो गई थी।