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Netflix पर मौजूद 1 घंटे 45 मिनट की तगड़ी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म, क्लाइमेक्स देख पकड़ लेंगे माथा
साल 2017 में आई 'इत्तेफाक' 1969 की कल्ट क्लासिक फिल्म का एक बेहतरीन मॉडर्न रीमेक है. फिल्म की शुरुआत एक ही रात में हुए दो मर्डर्स के साथ होती है. शक के घेरे में हैं मशहूर लेखक विक्रम सेठी (सिद्धार्थ मल्होत्रा) और माया (सोनाक्षी सिन्हा). दोनों के पास अपने-अपने बयान हैं, जो एक-दूसरे को कातिल ठहराते हैं. इस पेचीदा केस को सुलझाने की जिम्मेदारी सख्त पुलिस ऑफिसर देव (अक्षय खन्ना) के कंधों पर है, जिनके पास सच सामने लाने के लिए सिर्फ 3 दिन हैं. फिल्म की रफ्तार इतनी तेज है कि आपको सोचने का मौका भी नहीं मिलता और हर सीन के साथ सस्पेंस और गहरा होता जाता है.
सस्पेंस का जादू
पूरी फिल्म इसी सवाल पर टिकी है कि सच कौन बोल रहा है? सिद्धार्थ और सोनाक्षी दोनों ने अपनी कहानियों को इतनी सफाई से पेश किया है कि दर्शक अंत तक भ्रमित रहते हैं. फिल्म की स्क्रिप्ट हर मोड़ पर शक की सुई को एक से दूसरे किरदार पर घुमा देती है, जिससे रोमांच बना रहता है.
अक्षय खन्ना की जबरदस्त एक्टिंग
फिल्म की असली चमक अक्षय खन्ना हैं. एक अनुभवी और चतुर पुलिस अफसर के रूप में उनका अंदाज और सटीक डायलॉग डिलीवरी फिल्म को एक अलग लेवल पर ले जाती है. सिद्धार्थ मल्होत्रा और सोनाक्षी सिन्हा ने भी अपने 'ग्रे-शेडेड' किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है.
गानों के बिना नॉन-स्टॉप थ्रिल
बॉलीवुड की घिसी-पिटी परंपरा को तोड़ते हुए इस फिल्म में एक भी गाना नहीं रखा गया है. इससे फिल्म की पेस (Pace) कम नहीं होती और दर्शक कहानी से भटकाव महसूस नहीं करते. बैकग्राउंड स्कोर ही सस्पेंस को बढ़ाने का काम बखूबी करता है.
शाहरुख खान और प्रोडक्शन का तड़का
दिलचस्प बात यह है कि अक्षय खन्ना वाला रोल पहले शाहरुख खान को ऑफर किया गया था, लेकिन समय की कमी के चलते वे इसे नहीं कर पाए. हालांकि, उन्होंने इस फिल्म को रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के बैनर तले प्रोड्यूस किया, जिससे फिल्म को एक बड़ी और प्रोफेशनल ट्रीटमेंट मिली.
वो क्लाइमेक्स जो होश उड़ा देगा
फिल्म का अंत वह मास्टरस्ट्रोक है जिसके लिए इसे याद किया जाता है. जब आपको लगता है कि केस सॉल्व हो गया है, तभी फिल्म ऐसा यू-टर्न लेती है कि आप अपना माथा पकड़ लेंगे. 7.2 की IMDb रेटिंग वाली यह फिल्म सस्पेंस प्रेमियों के लिए एक 'हिडन जेम' है.